2019 लोक सभा चुनाव के लिए भाजपा विरोधी गठबंधन पर मायावती का अलग राग

लखनऊ में अपने नए आवास पर पहली बार संवाददाताओं से बातचीत करते हुए बसपा प्रमुख मायावती ने  कहा कि अगर बसपा को  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विरोधी गठजोड़ में ‘सम्मानजनक संख्या’ नहीं मिलती है तो पार्टी अकेले चुनाव लडऩा पसंद करेगी. उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद पूर्व मुख्यमंत्री को पुराना बंगला खाली करना पड़ा है. उन्होंने कहा, ‘हमारा दल गठजोड़ के खिलाफ नहीं है, लेकिन हमारा रुख एकदम साफ है कि हम किसी राजनीतिक दल से तभी गठजोड़ करेंगे जब हमें सीटों में सम्मानजनक हिस्सेदारी मिले. अन्यथा हमारा दल चुनाव में अकेले लडना पसंद करेगा.’ उन्होंने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव और कुछ राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों में विपक्ष की कवायद होगी कि भाजपा को किसी भी कीमत पर सत्ता में आने से रोका जाए. हालाँकि ये स्पष्ट नहीं हो पाया कि सम्मानजनक सीटें कितनी होंगी.
उन्होंने कहा मॉब लिंचिंग जैसी घटनाएं दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों, मुस्लिमों और ईसाइयों आदि के मामले में भाजपा की सरकारों के पक्षपातपूर्ण और सौतेले रवैए का परिणाम है. यह उनकी मूलभूत नीति का हिस्सा है और जो उनके सरकार में आने के बाद खतरनाक तरीके से बढ़ता गया है.  बसपा मुखिया ने कहा कि अनुसूचित जाति-जनजाति कानून में बदलाव के खिलाफ गत दो अप्रैल को दलित संगठनों द्वारा किए गए भारत बंद के बाद से दमन चक्र लगातार चल रहा है.
उन्होंने भाजपा पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन तक को अपने सियासी फायदे के लिए भुनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कि अगर प्रधानमंत्री और भाजपा वाजपेयी के पदचिह्नों पर चले होते तो देश में सांप्रदायिक घटनाएं नहीं होतीं और न ही भीड़तंत्र का राज होता.
बसपा प्रमुख ने कहा कि राफेल विमान खरीद मामले में जनता को अब तक कोई संतोषजनक जवाब दे पाने में विफल रही भाजपा लोकसभा और कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव नजदीक आते देख प्रलोभन भरी घोषणाएं कर और तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर अपनी असफलताओं पर पर्दा डाल रही है.

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