यात्रियों ने जेट एयरवेज के खिलाफ क़ानूनी कार्यवाही की चेतावनी दी; पायलट ड्यूटी से हटाये गये

जेट एयरवेज की मुंबई से जयपुर की फ्लाइट में पायलटों की लापरवाही से नाक और कान से खून बहने और दर्द का सामना करने वाले यात्रियों ने सोशल मीडिया पर जेट एयरवेज के खिलाफ भारी नाराजगी जताई. यात्रियों ने एयरलाइन पर सर्विस में भारी चूक करने का आरोप लगाया और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी.
मुंबई-जयपुर की उड़ान 9W 697 सुबह लगभग छह बजे रवाना हुई थी और टेक ऑफ के 10 मिनट बाद ही पैसेंजर सीटों के ऊपर लगे ऑक्सिजन मास्क खुल गए थे, इससे विमान में घबराहट फैल गई. बहुत से यात्रियों ने कान में तेज दर्द होने की शिकायत थी. कुछ की नाक और कुछ के कान से खून आना शुरू हो गया था.

विमान में सवार अंकुर काला सबसे अधिक प्रभावित यात्रियों में से एक हैं. उन्होंने ईटी को बताया, ‘वह बहुत बड़ा झटका था। इसका असर कुछ घंटे या कुछ दिनों में नहीं जाएगा.’ अंकुर और चार अन्य यात्रियों को सुबह लगभग 11 बजे नानावती हॉस्पिटल ले जाया गया. अंकुर ने बताया कि विमान में लगभग 30 यात्रियों का काफी खून बहा था.

कल जेट एयरवेज की मुंबई-जयपुर उड़ान में 30 से अधिक यात्रियों ने नाक और कान से खून आने की शिकायत की थी:
जेट एयरवेज की मुंबई-जयपुर उड़ान में गुरुवार को 30 से अधिक यात्रियों ने नाक और कान से खून आने की शिकायत की थी.  चालक दल के सदस्य केबिन के वायु दबाव को नियंत्रित करने वाले बटन को दबाना भूल गए जिसकी वजह से यात्रियों को दिक्कत हुई. विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) इस घटना की जांच कर रहा है और विमान के दोनों पायलटों को ड्यूटी से हटा दिया गया है. इस घटना के बाद नागर विमानन मंत्री सुरेश प्रभु ने सभी विमानन कंपनियों, हवाई अड्डों और पायलट प्रशिक्षण संस्थानों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट करने का आदेश दिया है. इस बारे में एक महीने में रिपोर्ट सौंपी जाएगी.
गुरुवार की घटना ने पायलटों के प्रशिक्षण पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. मुंबई से जयपुर जा रही जेट एयरलाइंस की उड़ान संख्या 9डब्ल्यू767 में 166 यात्री सवार थे और यह करीब 10 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था. तभी कुछ यात्रियों ने बैचेनी की शिकायत की और बोइंग 737 विमान वापस मुंबई लौट आया. इस दौरान केबिन के अंदर यात्रियों को ऑक्सीजन मास्क का सहारा लेना पड़ा. जब विमान ऊंचाई पकड़ता है तो वायुमंडलीय दाब कम होता है. इस कारण केबिन में वायु के दबाव की व्यवस्था होती है ताकि यात्री सामान्य ढंग से सांस ले सकें. केबिन में वायु का दाब बनाए रखने के लिए पायलट उड़ान भरने से पहले या फिर उड़ान भरने के तुरंत बाद ब्लीड स्विच ऑन कर देते हैं. यह उनकी नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है. लेकिन जेट के पायलट इस प्रक्रिया का पालन करने में नाकाम रहे. जेट ने एक बयान में कहा, ‘जेट एयरवेज डीजीसीए को जांच में पूरा सहयोग कर रही है.’ कंपनी ने कहा कि 144 यात्री वैकल्पिक उड़ानों से जयपुर रवाना हुए जबकि 17 अन्य ने अपनी यात्रा टाल दी. पांच यात्रियों को अतिरिक्त जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया और जांच के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई.

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