तपते जून में ठंडक का अहसास है “अक्टूबर”

नवीन शर्मा

वरुण धवन की अक्टूबर को आप आम प्रेमकथा मानकर देखने जाएंगे तो शायद आपको निराशा हाथ लगेगी. इसमें एक अलग तरह के लगावट की कहानी कहने का साहस निर्देशक शुजीत सरकार ने दिखाया है. अक्टूबर में वरुण धवन एक होटल मैनेजमेंट पास कर एक फाइव स्टार होटल में ट्रेनिंग ले रहे युवक दानिश वालिया(डैन) की भूमिका में हैं. वहीं उसके कई अन्य साथी भी ट्रेनिंग ले रहे होते हैं. इनमें एक लड़की है शिवली अय्यर. डैन की शिवली से सिर्फ अच्छी दोस्ती है उसे आप किसी भी एंगेल से प्रेमिका नहीं मान सकते. एक दिन शिवली अपने दोस्तों के साथ होटल की तीसरी मंजिल पर चल रही पार्टी में शामिल रहती है. वो डैन कहां है पूछते हुए मुंडेर से फिसल कर नीचे गिर जाती है. वो इतनी बुरी तरह घायल होती है कि उसे बड़ी मुश्किल से बचा तो लिया जाता है पर वो कोमा में चली जाती है. डैन भी अपने अन्य साथियों के साथ शिवली को देखने अस्पताल जाता रहता है. इसी दौरान उसे पता चलता है कि शिवली ने गिरने के ठीक पहले पूछा था कि वेयर इज डैन.

वेयर इज डैन?

बस यही तीन शब्द डैन की जिंदगी को बदल कर रख देते हैं.  डैन को लगता है कि शिउली के लिए वो सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति है. उसे लगता है कि कहीं ना कहीं शिवली उसे चाहती है. बस यहीं से फिल्म अलग मोड़ ले लेती है. डैन अपना अधिकतर समय अस्पताल में गुजारने लगता है. एक ऐसी लड़की की देखभाल के लिए जो कोमा में है. एक तरफ लकड़ी के परिजनों में से एक उसे मरने के लिए छोड़ देने पर आमदा था वहीं लड़की की मां और डैन सिवली को बचाने में अपनी पूरी ताकत झोंक देते हैं. एक बार उसकी अपने दोस्तों से बहस भी होती है एक दोस्त कह बैठता है कि डैन तुम सिवली की बीमारी से ज्यादा ही एफेकटेड हो तो वाजिक जवाब देता है क्या तुम लोग अनएफेकटेड नहीं? यह एक गंभीर सवाल है. हम अपने जीवन में देखते हैं कि अपनी व्यस्तता और करियर के चक्कर में अधिकतर लोग अपने निकट के परिजनों तक का भी मुसीबत के समय कम ही दूर तक साथ देते हैं. वहीं डैन इस हद तक आगे बढ़ता है कि वो अपनी नौकरी और करियर दांव पर लगा देता है.

उसकी यही संवेदनशीलता इस फिल्म की जान है. उसके विश्वास का परिणाम कुछ-कुछ सकारात्मक होता दिखाई देता है. सिउली कोमा से बाहर आती है उसे घर भी लाया जाता है. दर्शकों को लगता है कि अब फिल्म की हैप्पी एंडिंग होनेवाली है. सिउली पूरी तरह ठीक होकर डैन के साथ सुखमय जीवन बिताएगी पर एक दिन अचानक सिउली की मौत हो जाती है. दर्शकों को झटका सा लगता है. हो सकता है यह किसी सच्ची घटना से प्रेरित कहानी हो. इसलिए हैप्पी एंडिंग नहीं की गई हो. खैर इस फिल्म की खासियत ये है कि यह एक अनोखी प्रेम कहानी है. इसमें नायक-नायिका के प्रेम प्रसंग का एक भी दृश्य आपको ढूंढे ना मिलेगा. उसके बाद भी प्रेम के अहसास की महक आपको उसी तरह से महसूस होगी जैसे की हरसिंगार की खूशबू. हरसिंगार को ही सिवली भी कहा जाता है नायिका को ये फूल काफी पसंद थे इसी वजह से उसका नाम सिवली रखा गया. हरसिंगार के फूलों की उम्र काफी कम होती है उसी की माफिक फिल्म की नायिका की मौत भी कम उम्र में ही हो जाती है. सिवली की भूमिका निभा रही बनीता संधू कोमा में रही मरीज की भूमिका बड़े अच्छे ढंग से निभाती हैं. उसकी मां की भूमिका में गीतांजलि राव भी ध्यान खींचती हैं. वरूण धवन की बदलापुर के बाद यह दूसरी ऐसी फिल्म है जिसमें उसे संजीदा अभिनय करने का मौका मिला है. वरुण इस पर खरे उतरते हैं. वहीं निर्देशक शुजीत सरकार ने एक और साहस यह दिखाया है कि फिल्म में जबरन गाने ठूसने की कोशिश नहीं की है. शांतनु मोइत्रा का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के मिजाज के हिसाब से सटीक बैठता है.

बॉक्स ऑफिस का गणित:

कुल मिलाकर शुजीत ने एक अच्छी फिल्म बनाई है पर यह फिल्म बाक्स आफिस पर कमाल नहीं कर पाएगी. आम दर्शकों को यह फिल्म अपनी धीमी गति, विचित्र प्रेम कथा, गीतों की गैरहाजिरी व अन्य फिल्मी मसालों के नहीं होने की वजह से बोझिल लग सकती है. यह फिल्म अपन हास्पिटल सीन की वजह से पिछले वर्ष आई नसीरुद्दीन शाह की फिल्म वेटिंग की याद दिलाती है. अक्टूबर में जिस तरह का निस्वार्थ व निश्छल प्रेम दिखता है वो कुछ-कुछ अनुराग बासु की रणबीर कपूर अभिनीत फिल्मी बर्फी की भी याद दिलाता है. शुजीत सरकार की इस बात के लिए भी तारीफ की जानी चाहिए कि वो अलग-अलग मिजाज की फिल्में ले कर आ रहे हैं. विक्की डोनर, मद्रास कैफे, पिकू, पिंक और अब अक्टूबर ये सारी फिल्में अलग- अलग रंगों की हैं. शुजीत जैसे ही प्रतिभाशाली निर्देशक हमारी फिल्मों की दुनिया में विविधता के इंद्रधनुषी रंगों भरते हैं.


[jetpack_subscription_form title="Subscribe to Marginalised.in" subscribe_text=" Enter your email address to subscribe and receive notifications of Latest news updates by email."]

One thought on “तपते जून में ठंडक का अहसास है “अक्टूबर”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.