#Greenfuel सूरत में फलों और सब्जियों के waste से बायो-सीएनजी

सूरत: 
सूरत का  एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट मार्केट कमिटी (एपीएमसी) देश की पहली ऐसी कॉपरेटिव सोसायटी बनने जा रही है जो बायो-नैचरल गैस को व्यावसायिक रूप से बेचेगी. इस बायो-सीएनजी को गुजरात गैस लिमिटेड (जीजीएल) फलों और सब्जियों के बचे  हुए वेस्ट से बनाएगी. बड़े स्तर पर इसका उत्पादन कर इसकी बिक्री भी की जाएगी.

बायो-नैचरल गैस खरीद से जुड़े समझौते पर जीजीएल और एपीएमसी ने हस्ताक्षर किए हैं. बायो-वेस्ट से बायो एनर्जी और फूड प्रोसेसिंग प्लांट यहां पर एपीएमसी द्वारा पिछले साल जून में लगाया गया था, यहां नैचरल गैस और ऑर्गेनिक लिकर फर्टिलाइजर का प्रोडक्शन छह महीने पहले ही शुरू हुआ है.

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, एपीएमसी के बायो-एनर्जी प्लांट से प्रतिदिन 2 हजार किलो गैस और 1600 लीटर ऑर्गेनिक लिक्विड फर्टिलाइजर का उत्पादन हो रहा है. इस फर्टिलाइजर का प्रयोग खासकर कृषि क्षेत्र में फसल के अच्छे उत्पादन के लिए किया जा सकता है. इसी तरह बायो-नैचरल गैस भी पर्यावरण के अनुकूल है और इससे प्रदूषण भी नहीं होता.

जीजीएल इसके लिए एपीएमसी प्लांट में पाइपलाइन ग्रिड बिछाएगी जिसकी मदद से गैस को कस्टमर्स तक पहुंचाने के लिए ट्रांसफर स्टेशन तक लाया जाएगा. एपीएमसी सेक्रटरी नीलेश थोराट ने कहा कि पहली बार बायो-गैस की बिक्री के लिए किसी गैस वितरक द्वारा ऐसी व्यवस्था की गई है.


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