धर्म या अन्धविश्वास:छत्तीसगढ़ के इन देवी मंदिरों में खुद महिलाओं की परछाई भी अशुभ है

एक लम्बी कानूनी लड़ाई के बाद केरल के प्रसिद्द सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगे प्रतिबन्ध को सुप्रीम कोर्ट ने गैर क़ानूनी,गैर बराबरी बताते हुए  हटा दिया है. पर अफ़सोस की बात ये है कि ऐसे मंदिर देश के और हिस्सों में भी हैं, जहाँ पर महिलाओं का न केवल प्रवेश वर्जित है, बल्कि इससे भी ज्यादा उनकी परछाई भी अपवित्र मानी जाती है. सुनने में अजीब सा लगता है, पर छत्तीसगढ़ में अब भी दो ऐसे मंदिर है जहां एक तय उम्र की महिलाओं का प्रवेश प्रतिबंधित है. हैरानी की बात यह है कि इन मंदिरों में खुद देवी की पूजा होती है.

यहां के लोगों की मान्यता है कि जो भी मंदिर के बने नियमों को तोड़ता है उसे इसका बुरा अंजाम भुगतना पड़ता है. छत्तीसगढ़ के ये दो मंदिर हैं- मौली माता मंदिर जो बालोद जिले के पुरूर गांव में स्थित है और दूसरा ठाकुर दाई मंदिर है जो बस्तर के कांकेर जिले में रिसेवाडा गांव में है.

महिलाओं की परछाईं भी अशुभ मानी जाती है; प्रवेश तो दूर की बात है:

रिसेवाडा गांव का ठाकुर दाई (उमा देवी) मंदिर सुनसान इलाके में जंगल के बीच बना है. यहां पर महिलाएं दर्शन के लिए नहीं जा सकती हैं. यहां तक कि महिलाओं की परछाईं तक मंदिर परिसर में पड़ना अशुभ माना जाता है. यहां सिर्फ पुरुष ही देवी की पूजा करते हैं. यहां पर किसी को भी इसकी साफ जानकारी नहीं है कि महिलाओं का मंदिर में प्रवेश क्यों बैन है. लोगों का कहना है कि वे सिर्फ इतना जानते है कि महिलाएं मंदिर में गईं तो यह लोगों के जीवन के लिए अभिशाप है. लोगों का दावा है कि मंदिर में महिलाओं के जाने के कारण यहां कई ऐसी बुरी घटनाएं हो चुकी हैं.

मंदिर के पुजारी के सपने में देवी आई और आदेश दिया कि मंदिर में महिलाओं का प्रवेश रोको:

आदि शक्ति माता मौलि मंदिर में भी इसी तरह की मान्यता है. इस मंदिर में 18 वर्ष से ऊपर की महिलाओं का प्रवेश वर्जित है. सिर्फ नाबालिग लड़कियां और पुरुष ही मंदिर में जा सकते हैं. यह परंपरा यहां प्राचीनकाल से चली आ रही है. कहा जाता है कि कई वर्षों पहले मंदिर के पुजारी के सपने में देवी आईं थीं और उन्होंने शादी की उम्रवाली महिलाओं का मंदिर में प्रवेश प्रतिबंधित करने को कहा था क्योंकि देवी खुद कुवांरी हैं.

यहां की कई महिलाएं ऐसी हैं जो नाबालिग होने पर इस मंदिर में जाती थीं लेकिन अब उन्होंने मंदिर जाना बंद कर दिया है. यहां तक कि वे इस मंदिर का प्रसाद तक नहीं खाती हैं. हालांकि, कुछ लोगों का कहना है कि महिलाएं नवरात्रि में इस मंदिर के अंदर आकर काला जादू करती थीं इसलिए उनका प्रवेश वर्जित कर दिया गया है.

यहां तक कि गर्भवती महिलाओं के पति का भी मंदिर में प्रवेश वर्जित है. मान्यता है कि अगर कोई गर्भवती स्त्री का पति मंदिर में जाता है तो इसका विपरीत असर उसके होने वाले बच्चे पर पड़ता है. यहां पर हर कोई मंदिर की इस मान्यता को मानता है. कोई भी इसका विरोध नहीं करता.


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