सिकुड़ते वेटलैंड्स, खतरे में पड़ता मानव भविष्य

दुनिया भर में ताजे पेयजल के स्रोत तेजी से खत्म होते जा रहे हैं, जिससे निकट भविष्य में धरती पर मानव जीवन के लिए संकट पैदा हो सकता है. शहरीकरण, औद्योगीकरण, सड़कों, रेल मार्ग आदि के जमीन की बढती मांग, कृषि के बेहद तेजी से विस्तार के चलते 1970 से 2015 के बीच 35 फीसदी जल स्रोत जैसे झील, नदियां, दलदल और खाड़ियां खत्म हुए हैं. दुनिया की इकोसिस्टम के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले जलस्रोत दुनिया भर में 12 मिलियन स्क्वेयर किलोमीटर में फैले हुए हैं. लेकिन, 2000 के बाद इनकी संख्या में कमी होने की दर में तेजी से इजाफा हुआ है.

वेटलैंड्स पर हुए रामसर कन्वेंशन के मुखिया मार्ठा रोजास उरेगो ने दुनिया के वेटलैंड्स पर पहली रिपोर्ट तैयार की है. इस रिपोर्ट में उन्होंने कहा है कि पृथ्वी पर जंगलों से भी तीन गुना तेजी से नमी वाली भूमि यानी वेटलैंड्स में कमी आ रही है.

वेटलैंड  का महत्व:

ईरान के रामसर शहर में 1971 में पारित एक  convention के अनुसार आर्द्रभूमि ऐसा स्थान है जहाँ वर्ष में आठ माह पानी भरा रहता है. रामसर convention के अन्तर्गत वैश्विक स्तर पर वर्तमान में कुल 1929 से अधिक आर्द्रभूमियाँ हैं.

भारत सरकार में शुष्क भूमि को भी रामसर आर्द्रभूमियों के अंतर्गत ही शामिल किया है. वर्तमान में भारत में कुल 26 रामसर आर्द्रभूमियाँ अधिसूचित हैं. भारत द्वारा 2010 में 38 नये आर्द्रभूमियों को शामिल करने के लिए चिह्नित किया गया है. रामसर आर्द्रभूमि के रजिस्टर मॉण्ट्रक्स रिकॉर्ड्स के तहत उन आर्द्रभूमियों को शामिल किया जाता है, जो खतरे में हैं अथवा आ सकती हैं। इसके अनुसार भारत में केवलादेव (राजस्थान) और लोकटक झील (मणिपुर) खतरे में पड़ी आर्द्रभूमियाँ हैं. चिल्का झील (उड़ीसा) को इस रिकॉर्ड से बाहर कर दिया गया है.

आर्द्रभूमि संरक्षण और प्रबंधन अधिनियम 2010 (भारत) 

वर्ष 2011 में भारत सरकार ने आर्द्रभूमि संरक्षण और प्रबंधन अधिनियम 2010 की अधिसूचना जारी किया है। इस अधिनियम के तहत आर्द्रभूमियों को निम्नलिखित 6 वर्गों में बाँटा गया है:

  • अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियाँ.
  • पर्यावरणीय आर्द्रभूमियाँ। यथा- राष्ट्रीय उद्यान, गरान आदि.
  • यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल आर्द्रभूमियाँ.
  • समुद्रतल से 2500 मीटर से कम ऊँचाई की ऐसी आर्द्रभूमियाँ जो 500 हेक्टेयर से अधिक का क्षेत्रफल घेरती हों.
  • समुद्रतल से 2500 मीटर से अधिक ऊँचाई किंतु 5 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल.
  • ऐसी आर्द्रभूमियाँ जिनकी पहचान प्राधिकरण ने की हो.

इस अधिनियम के तहत केंद्रीय आर्द्रभूमि विनियामक प्राधिकरण की स्थापना की गयी है. इस प्राधिकरण में अध्यक्ष सहित कुल 12 सदस्य होंगे। इसी अधिनियम के तहत 38 नयी आर्द्रभूमियाँ पहचानी गयी हैं.

ताजे जल का श्रोत हैं वेटलैंड :

 दुनिया को शुद्ध और ताजे पेयजल की आपूर्ति का ये बड़ो स्रोत हैं.

 40 फीसदी से अधिक प्रजातियां वेटलैंड्स में ही रहती हैं और उन्हें इनके जरिए पोषण मिलता है.

 ऐसे तकरीबन एक चौथाई जानवरों और पौधों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं, जिनका घर वेटलैंड्स को माना जाता है.

– ये बाढ़ रोकने का काम करते हैं और तटीय इलाकों की रक्षा करते हैं। यही नहीं इनके जरिए दुनिया की तकरीब एक अरब आबादी अपनी आजीविका भी जुटाती है.

– फूड का बेहद महत्वपूर्ण सोर्स हैं। इसके अलावा रॉ मैटिरियल्स और मेडिसिन्स के जेनेटिक रिसोर्स के लिहाज से भी जरूरी हैं. क्लाइमेट चेंज को रोकने में भी महत्वपूर्ण हैं.


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