#MeToo: सुभाष घई पर बलात्कार के आरोप

 उन्होंने मेरी जींस उतारी और मेरे ऊपर आ गए.

#MeToo अभियान बॉलीवुड में महिला कलाकारों के यौन शोषण की छिपी कहानियों को उजागर कर रहा है. तनुश्री दत्ता, कंगना रानौत, चित्रांगदा सिंह, विनता नंदा की कड़ी में अगला नाम सुभाष घई का जुड़ गया है. सुभाष घई पर बलात्कार के आरोप लगे हैं.  अब महिला ने बताया, ‘यह सब उस समय हुआ जब मैं सुभाष घई के साथ एक फिल्म में काम कर रही थी. उन्होंने मुझसे कहा था कि वह मुझे गाइड करेंगे और आगे बढ़ाएंगे. मेरा इंडस्ट्री में कोई गॉडफादर या दोस्त नहीं था इसलिए मैंने उनका कहना माना. मैं भले ही मुंबई से नहीं थी लेकिन में सीखने के लिए हमेशा तैयार रहती थी. मैं अपने माता-पिता को दिखाना चाहती थी कि मैं एक अच्छी डायरेक्टर बन सकती हूं.’

‘शुरुआत में वह मुझे रिकॉर्डिंग स्टूडियो ले जाते थे जहां मुझे कई पुरुष मेंबर्स के साथ देर रात तक बैठे रहना पड़ता था. किसी ने उनके सामने कुछ नहीं किया. रिकॉर्डिंग खत्म होने पर घर आने के लिए मैं ऑटो लेती थी या फिर सुभाष घई मुझे छोड़ते थे. एक दिन उन्होंने धीरे से अपना हाथ मेरी जांघ पर रखा और मुझे गले लगाते हुए कहा कि मैंने बहुत अच्छा काम किया है. इसके बाद वह मुझे लोखंडवाला में स्थित उनके छोटे से अपॉर्टमेंट में स्क्रिप्ट सेशन के लिए भी बुलाने लगे. उनका कहना था कि वह दूसरी अभिनेत्रियों के साथ भी वहीं पर स्क्रिप्ट पढ़ा करते थे. मैं जब वहां पहुंची तो उस दो बेडरूम के घर में वह अकेले थे. वहां उनकी पत्नी नहीं रहती थीं. वह कहते थे कि यहीं पर बैठकर वह फिल्मों के बारे में आइडिया सोचते हैं और उन पर काम करते हैं.’

‘स्क्रिप्ट की जगह वह मुझे बताने लगे कि कैसे इंडस्ट्री में उन्हें सब गलत समझते हैं और सिर्फ मैं ही हूं जो उन्हें सच में पसंद करती है. वह रोने का नाटक करने लगे और अपना सिर मेरी गोदी में रख दिया. वह जब उठे तो मुझे जबरन किस करने लगे. मैं शॉक्ड रह गई और वहां से चली गई. अगले दिन ऑफिस में उन्होंने मुझे कहा कि लवर्स के बीच में नोंक-झोंक होती रहती है और मुझे अपने काम पर ध्यान देना चाहिए. मेरे पास उस समय न तो कोई और नौकरी थी, न पैसा और न ही परिवार. मैंने इस बारे में सिर्फ दो और लड़कियों को बताया जिनके साथ भी सुभाष घई ने ऐसा व्यवहार किया था.’

‘एक शाम रिकॉर्डिंग करते हुए फिर देर रात हो गई. सुभाष घई ने ड्रिंक लेने की सोची. उन्हें विस्की बहुत पसंद थी. उनका ड्राइवर हमेशा इसे कार में रखता था. उन्होंने मुझे भी पीने को दी जिसमें उन्होंने कुछ मिला रखा था. इसके बाद मुझे सिर्फ इतना याद है कि मैं उनकी कार में बैठी और मुझे लगा कि वह घर ड्रॉप करेंगे. लेकिन उन्होंने ड्राइवर बाबू से हमें लोनावला ले जाने को कहा. मैं होश में आती जाती रही. जब भी होश आता मैं यही पूछती की हम कहां जा रहे हैं और मुझे घर छोड़ दें.’

‘वह मुझे होटेल ले गए. उन्होंने कहा कि वह हमेशा लिखने के लिए वहां जाते हैं और उनके लिए हमेशा एक कमरा तैयार रहता है. मैं ठीक से चल नहीं पा रही थी, लेकिन उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे कमरे में ले गए. उन्होंने मेरी जींस उतारी और मेरे ऊपर आ गए. मैंने चिल्लाने की कोशिश की लेकिन उन्होंने मेरे मुंह पर हाथ रख दिया. ड्रिंक के कारण मुझ में ताकत नहीं बची थी. मैं रोई और फिर मैंने होश खो दिया. अगली सुबह उन्होंने टोस्ट मंगवाया और नाश्ता करने लगे.  जब मेरी नींद खुली सोफे पर लाल निशान थे.

‘सुभाष घई ने मुझे घर छोड़ा. मैं कुछ दिन ऑफिस नहीं गई जिसके बाद मुझे कॉल कर बताया गया कि मैंने नौकरी छोड़ी तो मुझे महीने भर का वेतन नहीं मिलेगा. मैं दफ्तर गई और एक हफ्ते बाद रिजाइन दे दिया. इसके बाद मैं उनसे कभी नहीं मिली. एक बार मैं अपने दोस्तों के साथ गई थी वहां सुभाष घई शूटिंग कर रहे थे. सेट पर मौजूद सभी लोग मुझे जानते थे लेकिन वहां रुकना मेरे लिए संभव नहीं था ऐसे में मैं वहां से चली गई.’


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