मोदी ने तेल आपूर्तिकर्ता देशों से रूपये में तेल का भुगतान लेने का आग्रह किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज तेल आपूर्तिकर्ता देशों से भुगतान की शर्तों की समीक्षा करने का आग्रह करते हुए कहा कि इससे कमजोर रुपये को कुछ राहत मिलेगी. उन्होंने यहां तेल मंत्रियों और प्रमुख तेल कंपनियों के मुख्य कार्याधिकारियों की एक बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही. बैठक के बाद जारी एक बयान के मुताबिक मोदी ने रुपये को फौरी राहत दिलाने के लिए भुगतान की शर्तों में समीक्षा का अनुरोध किया. इस साल डॉलर के मुकाबले रुपये में 14.5 फीसदी गिरावट आई है जिससे तेल और अन्य आयात ज्यादा महंगा हो गया है.
प्रधानमंत्री ने तेल उत्पादकों और उपभोक्ताओं के बीच साझेदारी की वकालत करते हुए कहा कि तेल की ऊंची कीमतों से प्रमुख उपभोक्ता देशों में संसाधनों का संकट पैदा हो सकता है. बयान में कहा गया, ‘इस अंतर को पाटने के लिए तेल उत्पादक देशों का सहयोग बहुत अहम है. प्रधानमंत्री ने तेल उत्पादक देशों से अपील की कि वे अपने निवेश योग्य अधिशेष को विकासशील देशों में निवेश करें ताकि वहां तेल दोहन की गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा सके.’ भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है और पिछले दो महीनों के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से खुदरा पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं. इससे महंगाई बढऩे का खतरा बढ़ गया है और रुपये में गिरावट से चालू खाते का घाटा बिगडऩे की आशंका है.
एक सूत्र के मुताबिक भारतीय चिंता पर प्रतिक्रिया जताते हुए सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री खालिद ए अल-फलीह ने कहा कि अगर तेल की कीमतें 40-45 डॉलर से नीचे जाती हैं तो उत्पादन अव्यावहारिक हो जाएगा. दूसरी ओर वेदांत के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा कि उनकी कंपनी भारत में 6-7 डॉलर प्रति बैरल के हिसाब से तेल उत्पादन कर रही है. वेदांत भारत में कच्चे तेल के उत्पादन की सबसे बड़ी निजी कंपनी है.  दुनिया की सबसे बड़ी तेल उत्पादक सऊदी अरामको के बोर्ड के चेयरमैन अल-फालीह ने कहा कि उनकी कंपनी भारत में खुदरा और पेट्रोरसायन उद्योग में और निवेश करेगी. सऊदी अरामको तीन लाख करोड़ रुपये की वेस्ट कोस्ट रिफाइनरी परियोजना में शामिल है.अल-फलीह ने कहा कि हम भारत में ईंधन के खुदरा और पेट्रोरसायन, एकीकृत डाउनस्ट्रीम खंड जैसे उपभोक्ताओं से सीधे रूबरू होने वाले क्षेत्रों को तलाशेंगे. उन्होंने भरोसा दिलाया कि कंपनी यह सुनिश्चित करेगी कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में ऊंची कीमतों के दौर के मद्देनजर भारत को आपूर्ति की कमी नहीं होगी. महाराष्ट्र में छह करोड़ टन क्षमता की रत्नागिरि रिफाइनरी ऐंड पेट्रोकेमिकल्स (आरआरपीसीएल) में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने के लिए इस साल की शुरुआत में सऊदी अरामको और अबू धाबी नैशनल ऑयल कंपनी (एडनोक) ने भारतीय तेल विपणन कंपनियों के साथ एक संयुक्त उद्यम का गठन किया था.
अल-फालीह ने कहा कि सऊदी अरब की दो दिग्गज कंपनियां रसायन क्षेत्र की साबिक और फॉस्फेट क्षेत्र की मादेन भारत में भारी निवेश की योजना बना रही हैं. उन्होंने कहा कि सऊदी अरामको भारत की कच्चे तेल के भंडारण से जुड़ी रणनीतिक परियोजना में निवेश करने की इच्छुक है. इस बैठक में बीपी पीएलसी के मुख्य कार्याधिकारी रॉबर्ट डडली, रॉयल डच शेल के बेन वान ब्यूरडेन, एक्सन मोबिल के डेरेन वुड्स, रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी और वेदांत के प्रमुख अनिल अग्रवाल के साथ-साथ कई देशों के ऊर्जा मंत्री शामिल थे.  इस मौके पर पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछले एक साल में तेल की कीमतें बढऩे से भारत को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इस दौरान तेल रुपये के संदर्भ में 70 फीसदी महंगा हो चुका है. इस पर अल-फालीह ने कहा कि मौजूदा बाजार कीमतें संतुलित हैं. उन्होंने कहा, ‘हम वैश्विक अर्थव्यवस्था को मदद करते रहेंगे और उपभोक्ताओं को कीमतों में छूट देंगे.’
सऊदी नेता ने कहा कि उनके देश द्वारा उठाए गए कदमों के कारण ही तेल की कीमत तिहरे अंकों तक नहीं पहुंची. उन्होंने कहा कि आज दुनिया में 99.8 फीसदी वाहन परंपरागत ईंधन पर चल रहे हैं और एक दशक बाद भी ऊर्जा बाजार में तेल एवं गैस का दबदबा रहेगा. एडनॉक के मुख्य कार्याधिकारी सुल्तान अहमद अल जाबर ने कहा कि 2040 तक भारत की तेल मांग में 160 फीसदी का इजाफा होगा. उन्होंने कहा कि तब भी भारत की तेल जरूरतों में जीवाश्म ईंधन का 80 फीसदी योगदान होगा.

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