सीबीआई डायरेक्टर ने सरकार पर हमला बोला; स्वामी वर्मा के समर्थन में; कांग्रेस धरना देगी; अस्थाना पर जांच

नयी दिल्ली: छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा ने सरकार पर जबर्दस्त हमला बोल दिया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि कई संवेदनशील मामलों में जांच सरकार की मनचाही दिशा में नहीं जा रही थी जिसकी वजह से उन्हें हटाया गया. वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि सीवीसी और केंद्र दोनों ने रातोंरात उन्हें सीबीआई के डायरेक्टर के पद से हटाने का फैसला कर लिया. ये दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के सेक्शन 4B के खिलाफ है.

दरअसल, सीबीआई में घूसकांड पर मचे घमासान के बीच मंगलवार आधी रात केंद्र सरकार ने सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना से सभी अधिकार छीन लिए गए और दोनों को छुट्टी पर भेज दिया गया. साथ ही एम. नागेश्वर राव को तत्काल अंतरिम डायरेक्टर बना दिया गया. काम संभालते ही नागेश्वर ने 9 अफसरों का तबादला कर दिया.

सरकार ने तबादले पर सफाई भी दी. वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि यह फैसला केंद्रीय सर्तकता आयोग (सीवीसी) की सिफारिशों के आधार पर किया गया. सीबीआई के सीनियर अफसरों के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की वजह से असाधारण और दुर्भाग्यपूर्ण हालात बन गए थे. एजेंसी की ईमानदारी और विश्वसनीयता को कायम रखने के लिए यह फैसला जरूरी था.

हालांकि कांग्रेस ने इसपर पलटवार करते हुए सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है.. कांग्रेस ने कहा है कि अपने गलत कारनामों को छिपाने के लिए सरकार ने अंसवैधानिक तौर पर सीबीआई डायरेक्टर को हटाया. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की अवमानना की है.

सुब्रमनियम स्वामी भी सीबीआई काण्ड पर अपनी सरकार पर बरसे: 

CBI डायरेक्टर आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने पर बीजेपी सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी आलोक वर्मा के समर्थन में आ गए हैं. उन्होंने कहा, “मुझे आश्चर्य है कि आलोक वर्मा जैसे एक ईमानदार व्यक्ति को शिफ्ट कर दिया गया है. पी चिदंबरम के खिलाफ आलोक वर्मा ने काफी साफ-सुथरी जांच करवाई थी. दिल्ली पुलिस के कमिश्नर के तौर पर उनका काम अच्छा था.”

साथ ही स्वामी ने अपने सरकार पर बड़ा आरोप भी लगाया. उन्होंने कहा, सीबीआई के बाद अगला नंबर ईडी के अधिकारियों का होगा. ये लोग अंतरिम सीबीआई डायरेक्टर राजेश्वर को हटाना चाहते हैं. अगर ऐसा हुआ, तो भ्रष्टाचार से लड़ने की कोई वजह नहीं बचेगी. मेरी सरकार ही भ्रष्ट लोगों को बचा रही है. अगर ऐसा हुआ, तो मैंने भ्रष्टाचार के खिलाफ जितने मुकदमे दायर किए हैं, सब वापस ले लूंगा.

केंद्र सरकार ने वर्मा पर आरोप लगाए:

इधर, सरकार का कहना है कि आलोक वर्मा अपने खिलाफ जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं. सरकार ने बुधवार को दावा किया कि वर्मा केंद्रीय सतर्कता आयोग का सहयोग नहीं कर रहे थे. एजेंसी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के खिलाफ ‘भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों’ की वजह से एक ‘असाधारण और अभूतपूर्व’ स्थिति बन गई थी. सीबीआई आपसी विवाद चरम पर पहुंच गया है, जिससे इस प्रमुख संस्था की विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा को गहरा आघात पहुंचा जबकि इसके अलावा संगठन में कामकाज का माहौल भी खराब हुआ है.

सरकार ने कहा कि सीवीसी को 24 अगस्त 2018 को एक शिकायत मिली थी, जिसमें सीबीआई के सीनियर अफसरों पर कई आरोप लगाए गए थे. सीवीसी ने सीवीसी अधिनियम, 2003 की धारा 11 के तहत 11 सितंबर को तीन नोटिस जारी कर सीबीआई डायरेक्टर को आयोग के सामने फाइलें और दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा था.

कांग्रेस सीबीआई मसले पर धरना देगी:

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के निदेशक आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने के केंद्र सरकार के आदेश के खिलाफ कांग्रेस शुक्रवार को दिल्ली में सीबीआई मुख्यालय व राज्यों की राजधानियों में सीबीआई के कार्यालयों के सामने धरना- प्रदर्शन करेगी. राजधानी दिल्ली में इस प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के भी शामिल होने की संभावना है. कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि पार्टी सीबीआई निदेशक के खिलाफ आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस पूरे प्रकरण पर देश से माफी मांगने की मांग करेगी. सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी बृहस्पतिवार को राजस्थान के दौरे से लौटने के बाद इस मसले पर संवाददाता सम्मेलन बुला सकते हैं.

सुरजेवाला ने एक ट्वीट में कहा कि वर्मा को हटाकर मोदी सरकार ने सीबीआई की आजादी में आखिरी कील ठोक दी है. सुनियोजित तरीके से सीबीआई को खत्म करने और उसे बदनाम करने की कोशिश पूरी हो गई. प्रधानमंत्री ने यह सुनिश्चित किया कि प्रमुख जांच एजेंसी सीबीआई की ईमानदारी, विश्वसनीयता खत्म हो जाए.

अस्थाना पर जांच शुरू:

सीबीआई के अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव बुधवार सुबह सात बजे ही दफ्तर पहुंच गए. उन्होंने पहला आदेश जारी करते हुए राकेश अस्थाना के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार और जबरन वसूली के आरोपों की जांच कर रही पूरी टीम को हटा दिया. उन्होंने नई टीम का गठन किया. अब मामले की जांच सीबीआई में पुलिस अधीक्षक सतीश डागर करेंगे. डागर इससे पहले डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम से जुड़े मामले की जांच कर चुके हैं. इस टीम में संयुक्त निदेशक वी मुरुगेशन को भी शामिल किया गया है. डागर की टीम पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) तरुण गौबा को रिपोर्ट करेगी. गौबा मध्यप्रदेश के बहुचर्चित व्यापमं घोटाले की जांच कर चुके हैं. गौबा चंडीगढ़ यूनिट में तैनात थे. गौबा से पहले यह जिम्मेदारी डीआईजी अरुण कुमार सिन्हा निभा रहे थे.


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