‘CBI=BBI’ यानी सीबीआई अब ‘बीजेपी ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन’ बन गई है: ममता बनर्जी 

नयी दिल्ली: सीबीआई में जारी जंग का मामला आलोक वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा दिया है और केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती दी है. सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा  ( Alok Verma) ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिका में इशारा किया है कि सरकार ने सीबीआई के कामकाज में हस्तक्षेप करने की कोशिश की. 23 अक्तूबर को रातोंरात रेपिड फायर के तौर पर CVC और DoPT ने तीन आदेश जारी किए. यह फैसले मनमाने और गैरकानूनी हैं, इन्हें रद्द किया जाना चाहिए.

आलोक वर्मा की ओर से दाखिल की गई याचिका में शामिल प्रमुख बिंदु-  

  1. सीबीआई से उम्मीद की जाती है कि वह एक स्वतंत्र और स्वायत्त एजेंसी के तौर पर काम करेगी. ऐसे हालात को नहीं टाल जा सकता, जब उच्च पदों पर बैठे लोगों से सम्बंधित जांच की दिशा सरकार की मर्जी के मुताबिक न हो. हालिया दिनों में ऐसे केस आए जिनमें जांच अधिकारी से लेकर ज्वाइंट डायरेक्टर/ डायरेक्टर तक किसी खास एक्शन तक सहमत थे, लेकिन सिर्फ स्पेशल डायरेक्टर की राय अलग थी.
  2. सीवीसी, केंद्र ने रातोंरात मुझे सीबीआई डायरेक्टर के रोल से हटाने का फैसला लिया और नए शख्स की नियुक्ति का फैसला ले लिया, जो कि गैरकानूनी है.
  3. सरकार का यह कदम DSPE एक्ट के सेक्शन  4-b के खिलाफ है, जो सीबीआई डायरेक्टर की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए दो साल का वक्त निर्धारित करता है.
  4. DSPE एक्ट के सेक्शन 4 A के मुताबिक सीबीआई डायरेक्टर की नियुक्ति  प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और CJI की कमेटी करेगी. सेक्शन 4b(2) में सीबीआई डायरेक्टर के ट्रांसफर के लिए इस कमेटी की मंजूरी ज़रूरी है. सरकार का आदेश इसका उल्लंघन करता है.
  5. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट भी सीबीआई को सरकार के प्रभाव से मुक्त करने की बात कर चुकाहै. सरकार के इस कदम से साफ है कि सीबीआई को DOPT से स्वतंत्र करने की ज़रूरत है.
  6. मुझे संस्थान (CBI) के अधिकारियों पर पूरा भरोसा है, और इस तरह का गैरकानूनी दखल अधिकारियों के मनोबल को गिराता है.

आलोक वर्मा ने इशारा किया है कि सरकार ने सीबीआई के कामकाज में हस्तक्षेप करने की कोशिश की. 23 अक्तूबर को रातोंरात रेपिड फायर के तौर पर CVC और DoPT ने तीन आदेश जारी किए. ये फैसले मनमाने और गैरकानूनी हैं, इन्हें रद्द किया जाना चाहिए. याचिका में आलोक वर्मा ने कहा है कि सीवीसी, केंद्र ने मुझे सीबीआई निदेशक की भूमिका से हटाने के लिए  “रातों रात निर्णय” लिया.

यह फैसला DSPE अधिनियम की धारा 4 बी के विपरीत है जो एजेंसी की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए सीबीआई प्रमुख को दो साल की सुरक्षित अवधि प्रदान करता है. आलोक वर्मा की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में यह भी कहा गया है कि एक स्वतंत्र और स्वायत्त सीबीआई की आवश्यकता है.

वहीं, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सीबीआई की आंतरिक कलह के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को घेरने के वास्ते 2013 के उनके एक ट्वीट को रीट्वीट किया जिसमें मोदी ने तत्कालीन संप्रग सरकार पर देश के खुफिया तंत्र को कथित तौर पर कमजोर करने का आरोप लगाया था. बता दें कि सरकार ने सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाने के चलते बुधवार को छुट्टी पर भेज दिया.

केजरीवाल ने मोदी का पांच साल पुराना ट्वीट रीट्वीट किया: 

इस मामले में अरविंद केजरीवाल ने कई ट्वीट करके सीबीआई निदेशक को छुट्टी पर भेजने के मोदी सरकार के अधिकार पर प्रश्न उठाया और साथ ही संदेह जताया कि कहीं यह कदम राफेल सौदे से जुड़ा तो नहीं है. केजरीवाल ने मोदी द्वारा पांच जून 2013 में किए गए ट्वीट को रीट्वीट किया जिसमें उन्होंने कहा था, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बनाने की इच्छा के चलते केन्द्र खुफिया तंत्र को कमजोर कर रहा है और सीबीआई आईबी अधिकारियों से पूछताछ कर रही है.’ बता दें कि कांग्रेस की अगुवाई वाली संप्रग सरकार 2013 में सत्ता में थी.

Narendra Modi

Unfortunate that in its quest to target political opponents, Centre is undermining intelligence systems with CBI questioning IB officials.

अरविंद केजरीवाल ने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘सीबीआई निदेशक को छुट्टी पर भेजने के पीछे की वजह क्या है? लोकपाल अधिनियम के तहत नियुक्त किए गए एक जांच एजेंसी के प्रमुख के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार मोदी सरकार को किस कानून के तहत मिला. मोदी क्या छिपाने की कोशिश कर रहे हैं?”

बुधवार को शाम के वक्त केजरीवाल ने त्रिनगर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी ने देर रात तीन बजे सीबीआई के निदेशक को बर्खास्त कर दिया. क्या आप यह जानते हैं? क्यों? मैं बताता हूं क्योंकि मोदी सरकार एक राफेल लड़ाकू विमान 1,500 करोड़ रुपए में खरीद रही है. पहले इसका मूल्य 546 करोड़ रुपए था। वे 36 राफेल विमान खरीदने में 36,000 करोड़ रुपए का घेाटाला कर रहे हैं.’

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘जब सीबीआई के निदेशक (आलोक वर्मा), जो इमानदार व्यक्ति हैं, ने इस मामले की जांच शुरू की तो अचानक रात तीन बजे उन्हें हटा दिया गया.’. बता दें कि इस मामले पर कांग्रेस भी हमलावर है और शुक्रवार को सरकार के खिलाफ हल्ला बोलने का ऐलान भी कर दिया है.

‘CBI=BBI’ यानी सीबीआई अब ‘बीजेपी ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन’ बन गई है: ममता बनर्जी 

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) में भ्रष्टाचार को लेकर चल रही कलह के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी मोदी सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर हमला बोला है. सीबीआई में छिड़ी जंग के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को केंद्रीय जांच एजेंसी को ‘बीजेपी ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन’ बताया. गौरतलब है कि मोदी सरकार ने बुधवार को सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेज दिया. सरकार ने वर्मा व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच एक दूसरे पर रिश्वत से जुड़े आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच यह फैसला लिया.

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