बाजारवाद के दबाब में भारतीय संस्कृति सिम्बल्स में सिमटती जा रही है : घुंघरू परमार

घुंघरू परमार 

भारतीय संस्कृति, साड़ी से सलवार कमीज में शिफ्ट हो गई है. सलवार कमीज, जींस और भर हाथ चूड़ा में शिफ्ट हो गयी है. प्रेम मँहगे गोल्ड सेट  से और महंगे डायमंड-सेट में शिफ्ट हो गया है. पतिव्रता का मापदंड लंबे मंगलसूत्र से छोटे डिजाइनर मंगलसूत्र में शिफ्ट हुआ है. पाउडर सिंदूर, लिकुइड ब्रेंडेड सिंदूर में शिफ्ट हुई है. भजन-कीर्तन, किटी पार्टीज में, और आधुनिकता सीरियल्स की नायिकाओं की वेश-भूषा कॉपी करने में शिफ्ट हुई है.  महिलाओं के साथ भेद-भाव खतम कर कुछ पति साथ में उपवास रख कर समानता की ओर  शिफ्ट कर रहे हैं. महिलाओं कीे प्रगति सुपरवुमन बनने में ,घर-जॉब के साथ-साथ उपवास भी रखने में शिफ्ट कर गयी हैं वरना, वो पिछड़ी हुई कहलाएंगी.

महिलाएं क्रान्ति कर रहीं हैं,रूढ़ि-जड़ता से मुक्ति पाने के लिए. कुछ बहिनों की क्रांति करवा-चौथ और तीज आदि जैसे उपवास में रुक कर विश्राम कर लेती है.  आजादी के मायने- जिसे उपवास करना है करे,जिसे ना करना है ना करे इस बात पर शिफ्ट हो गयी है. अधिकार- साल में 2-4 दिन तो आता है,कर लेने से क्या बिगड़ जाता है,इस कुतर्क पर शिफ्ट हो गयी है. मूर्खताएँ- उपवास मोटापा कम करता और पति की उम्र बढ़ाता फिर भी इतनी विधवाएँ भारतीय समाज में ही हैं. मिथ- जो तीज,करवा-चौथ नहीं करतीं,उनके बीच प्रेम नहीं है. सच-इस तरह के त्योहारों को टी.वी. ने ग्लैमरस दे कर बढ़ावा दिया है. विडंबना- स्मार्ट युग में जाते हुए भी हम संस्कृति के नाम पर बकलोली से नहीं निकलना चाहते.

उच्च मध्यवर्गीय परिवारों के लिए जहां यह एक मनोरंजक शै है,वहीं निम्न मध्यवर्गीय परिवारों के लिए देखादेखी में नाक-स्टेटस मेंटेन करने की जद्दोजहद. निम्नवर्गीय परिवारों के लिए आर्थिक असंतुलन और क्षोभ,निराशा,विषाद के सिवा कुछ नहीं. ऐसे भी प्रेम,प्रदर्शन करने की वस्तु तो है नहीं. दो व्यक्ति के बीच का अनुराग कोई मार्केट या ग्लैमर डिसाइड नहीं कर सकता,वह मापदंड नहीं हो सकता. परम्पराओं और जड़ता के बीच का महीन फर्क हम समझ कर भी क्यों नहीं समझना चाहते!

आधुनिक पतियों को इस ढोंग-ढकोसले का खुल कर विरोध करना चाहिए.  होना यह चाहिए कि साथ में भूखे रह उपवास करने से अच्छा,साथ में खाएं-खिलाएं. ऐसे भी महिलाएं एनीमिया, सरदर्द,एसिडिटी, कमर दर्द,विटामिन डी की कमी से जूझती ही रहतीं हैं. मोटापा कम या संतुलित करने उपवास से तो बिल्कुल सम्भव नहीं होना. इसके लिए प्रॉपर डाइट,एक्सरसाइज और समय से खाना. तो क्यों नहीं इस परंपरा का आधुनिकीकरण करते हुए,आधुनिक पति महँगे गिफ्ट्स के बजाय डाइट चार्ट बना कर फॉलो करें और करवाएं.

कमजोर,बीमार और अस्वस्थ शरीर से क्या संभव है भला,भूखे रहने से किसका भला हुआ है भला!!


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