तेजप्रताप और ऐश्वर्या के बिगड़े संबंधों के लिए मीसा का राजनीतिक खेल तो जिम्मेवार नहीं?

राजद के राजनीतिक सूत्रों से कुछ ऐसी बातें छन कर आ रही हैं, जो राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के सुपुत्र तेज प्रताप यादव के वैवाहिक जीवन में आये तूफ़ान पर अलग ही रौशनी डाल रही हैं. सूत्रों के अनुसार, राजद सुप्रीमो फिलहाल इस पारिवारिक लड़ाई में लाचार महसूस कर रहे हैं. कोई उनकी सुनने को तैयार नहीं. उधर राबरी देवी भी परेशान हैं. परिस्थतियाँ उनके बस से भी बाहर निकल चुकी हैं.

परिवार में दूसरी पीढ़ी के बच्चों की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं खुल कर सामने आ गयी हैं. और इस राजनीतिक महत्वाकांक्षा की आग को हवा दे रहे हैं शादी के बाद लालू परिवार से जुड़े समधियाने के लोग. ताजा घटनाक्रम में ये बात सामने आ रही है कि तेज प्रताप की पत्नी ऐश्वर्या अपने पिता के लिए छपरा लोक सभा सीट चाह रही थी; पर मीसा यादव अपने पति शैलेन्द्र के लिए यही सीट चाह रही थी. राजद सुप्रीमो के परिवार वालों की नज़र में छपरा सीट घरेलु सीट है और यहाँ से जीत की संभावनाए बहुत ज्यादा है. कहने की जरुरत नहीं कि खुद मीसा यादव पाटलिपुत्र लोक सभा सीट से चुनाव लड़ चुकी हैं, और २०१९ में भी वे वहीं से अपना दावा ठोकेंगी. लालू यादव पर पारिवारिक दबाब बढ़ता जा रहा है, और इसकी हालत भी अब लोजपा की तरह होती जा रही है, जहां चचा, भतीजा, भाई, भौजाई से परे जाकर देखा नहीं जा रहा है.

मीसा यादव जानती हैं कि वे घर में सबसे बड़ी संतान होने के बावजूद पिता की राजनीतिक धरोहर की वारिस नहीं हैं, और निकट भविष्य में ऐसी संभावना भी नहीं है. खासकर जिस तरह से उनके खिलाफ एन्फोर्समेंट डिपार्टमेंट ने अवैध संपत्ति के मामले में  मोर्चा खोल दिया है, और दिल्ली में सैनिक फार्म में स्थित फार्म हाउस को जब्त कर लिया है,  और इस केस में उनके पति शैलेन्द्र भी अभियुक्त हैं. उन्हें ये बात अच्छी तरह मालुम है कि लोक सभा चुनाव के चलते केंद्र में भाजपा सरकार उन्हें किसी प्रकार की ढील देने के लिए तैयार नहीं है. ऐसे में वे अपनी स्थिति राज्य से बाहर केंद्र में अधिक से अधिक मज़बूत करना चाहती हैं.

दूसरी ओर, ऐश्वर्या जिस परिवार से आती हैं, वो राजनीतिक रूप से एक कद्दावर परिवार है. और ऐश्वर्य के पिता लालू कैबिनेट में मंत्री रह चुके हैं, और उनके दादा दरोगा राय बिहार के मुख्यमंत्री. दोनों परिवारों की स्पष्ट समझ है कि शादी महज दो दिलों का मेल नहीं हुआ है, बल्कि दो राजनीतिक परिवारों का गठबंधन है. ऐसे में लेन देन बिलकुल स्वाभाविक है. खुद तेज प्रताप ये बात स्वीकार कर चुके हैं कि ऐश्वर्या अपने पिता के लिए छपरा से टिकट चाह रही थीं. अब ये चाह नाजायज़ नहीं कही जा सकती. पर ऐश्वर्या की इस चाह से मीसा और ऐश्वर्या के बीच तलवार निकल आई है. ऐश्वर्या की राजनीतिक पकड़ के चलते मीसा कुछ बिगाड़ की स्थिति में  नहीं हैं. ऐश्वर्या को इस बात की अच्छी समझ है  कि परिवार में केवल तेज प्रताप ही ऐसे  हैं,जिनके ऊपर किसी तरह का मुकदमा नहीं है. खुद तेजस्वी यादव के ऊपर आय से अधिक संपत्ति के मामले में केस चल रहे हैं, जिन पर फैसला जल्दी आ सकता है. और इस बात की संभावना है कि कहीं वे अपने पिता की तरह राजनीति के लिए अयोग्य घोषित न कर दिए जाए.

ऐसे में ऐश्वर्या की कोशिश है कि वे अपने पति तेज प्रताप को राजनीतिक शतरंज में एक मोहरे की तरह इस्तेमाल कर सकें. कुल मिलाकर मामला महज तेज प्रताप और ऐश्वर्या के वैवाहिक संबंधों से नहीं जुड़ा है, और भी खिलाड़ी शामिल हैं इस खेल में.


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