‘धर्मादेश’ : राममंदिर के लिए कानून बनाये या अध्यादेश लाये सरकार

नयी दिल्ली : अखिल भारतीय संत समिति ने दो दिवसीय बैठक के बाद सरकार को चेतावनी दी है कि वो अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए या तो कानून बनाये या अध्यादेश लाये. गौरतलब है कि इस दो दिवसीय संत समागम में तीन हजार से ज्यादा साधु संतों ने भाग लिया और पुरजोर आवाज में राम मंदिर की वकालत की. संत समिति के वरिष्ठ नेता रामानंद हंसदेवाचर्य ने बैठक के समापन अवसर पर उक्त बातें कहीं. आज की बैठक में श्री-श्री रविशंकर भी पधारे और कहा कि आम जनता चाहती है कि अयोध्या में राम मंदिर बने, तो उसे बनना चाहिए. उन्होंने कहा कि हमारे पास तीन विकल्प हैं एक-बातचीत से मसले का हल निकाला जाये. दो-सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना दे और तीसरा कि सरकार अध्यादेश ले आये. यह मामला पिछले 500 साल से लटका हुआ है और अबतक इसका कोई समाधान नहीं निकला.

फिर जागा राम प्रेम, भड़काऊ भाषण शुरु

2019 का चुनाव नजदीक आते ही भाजपा के ‘फायर ब्रांड’ नेता सक्रिय हो गये हैं और राम मंदिर के मामले को हवा देनी शुरू कर दी है. साध्वी प्राची, गिरिराज सिंह, उमा भारती सब एक सुर में मंदिर निर्माण की मांग कर रहे हैं, मानो यह मामला अभी हाल का हो, सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनवाई टालने से लाखों लोगों को नुकसान हो रहा हो. उमा भारती ने तो यह तक कह दिया कि हिंदू सहिष्णु हैं लेकिन अगर अयोध्या में मस्जिद बना तो हिंदू असहिष्णु हो जायेंगे.

सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी तक टाल दी है सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद पर सुनवाई को जनवरी तक के लिए टाल दिया है. ऐसी संभावना भी है कि इस केस की सुनवाई नयी बेंच करेगी . कोर्ट ने इस मामले में तुरंत सुनवाई की दलील को अनसुना कर दिया. सरकार के वकील तुषार मेहता ने इस मामले में कोर्ट से अपील किया कि कोर्ट बताये कि इस मामले की जनवरी में कब से सुनवाई शुरू होगी. इसपर बेंच ने कहा कि यह सब फैसला नयी पीठ करेगी. पहले चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन जज की टीम मामले की सुनवाई करने वाली थी, जिसने मामले को जनवरी तक के लिए टाल दिया.

क्या है मामला जिसपर सुप्रीम कोर्ट में हो रही सुनवाई

गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2010 में विवादित जमीन पर मालिकाना हक तीन टुकड़ों में बांट दिया था जिसमें मंदिर के गर्भ गृह पर राम मंदिर बनाने का आदेश दिया था. कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ हिंदू महासभा और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है.

मामला 1949 से अदालतों में लंबित
राममंदिर के विवादित स्थल पर मालिकाना हक का मामला 1949 से देश की अदालतों में लंबित है. इतिहास के अनुसार 1528 ई में अयोध्या में एक ऐसे स्थल पर एक मस्जिद का निर्माण किया गया, जिसके बारे में यह कहा जाता था कि यह भगवान राम का जन्म स्थान है.
विवाद उसी समय से है. 1859 में ब्रिटिश शासकों ने विवादित स्थल पर बाड़ लगा दी और परिसर के भीतरी हिस्से में मुसलमानों को और बाहरी हिस्से में हिंदुओं को प्रार्थना करने की अनुमति दे दी. 1949 में भगवान राम की मूर्तियां मस्जिद में पाई गईं. जिसके बाद विवाद शुरु हो गया और सरकार ने इस स्थल पर ताला लगवाया दिया. 1986 में राजीव गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में इस विवादित स्थल का ताला खुलवा दिया गया था.


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