जीवन की त्रासदी: राखी और गुलज़ार; जब अलग होने का गम हो, और साथ रहना भी संभव न हो

लंबा वक़्त गुज़र गया है. इस बीच काफी दुनिया देख ली है दोनों ने, पर अलग अलग. एक संजीदा शायर और दूसरी, संवेदनशील कलाकार. साथ जीवन जीने का फैसला किया पर साथ निभा न सके. तलाक भी नहीं हुआ. एक अजीब सा रिश्ता गुलज़ार और राखी का.  मुंबई से पचास किलोमीटर दूर पनवेल के किसी फॉर्म हाउस में रह रही राखी कम दिखती हैं, कम बोलती हैं, अपनी दुनिया में खोयी रहती हैं.
प्रतिष्ठित दादा साहब फालके पुरस्कार से सम्मानित और  ‘आंधी’, ‘मौसम’, ‘मेरे अपने’, ‘कोशिश’, ‘खुशबू’, ‘अंगूर’, ‘लिबास’ और ‘माचिस’ जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुके गुलजार मुंबई में एकाकी जीवन गुज़ार रहे हैं. कम मौकों पर दोनों मिलते हैं. इन दोनों के बीच की भावनात्मक कड़ी है इनकी बेटी: मेघना गुलज़ार उर्फ़ बोस्की.
क्यों अलग हुए राखी और गुलज़ार?
गुलजार राखी के दूसरे पति हैं. उन्होंने 15 मई 1973 को राखी से शादी की. बेटी मेघना के जन्म (13 दिसंबर, 1973) के एक साल बाद ही दोनों अलग हो गए थे. दरअसल, गुलजार नहीं चाहते थे कि राखी फिल्मों में काम करें. एक बार गुलजार अपनी फिल्म ‘आंधी’ (1975) की शूटिंग के लिए बेहतर लोकेशन की तलाश में कश्मीर गए थे. उस दौरान राखी भी साथ थीं.  गुलजार अपने काम में डूबे रहते थे, जबकि राखी अकेली बैठी-बैठी बोर हो जाती थीं. इसी बीच एक रोज फिल्म ‘आंधी’ के एक्टर संजीव कुमार और सुचित्रा सेन होटल में पार्टी कर रहे थे. इस दौरान संजीव कुमार ने काफी शराब पी ली. इसके बाद जब सुचित्रा अपने कमरे में जाने लगी तो नशे में धुत्त संजीव ने उनका हाथ पकड़ लिया और उन्हें अपनी तरफ खींचने लगे. ये सब देखकर गुलजार सुचित्रा को बचाने के लिए दौड़े. एक तरफ संजीव कुमार सुचित्रा का हाथ पकड़ कर खींच रहे थे तो दूसरी ओर गुलजार उन्हें संजीव से छुड़ाने की कोशिश कर रहे थे. कुछ देर बाद गुलजार ने किसी तरह सुचित्रा को संजीव से छुड़ाया और उन्हें उनके कमरे तक छोड़ने गए. जब गुलजार उन्हें छोड़कर लौट रहे थे तो रास्ते में राखी टकरा गईं. राखी काफी गुस्से में थीं और जानना चाह रही थीं कि गुलजार आखिर सुचित्रा को छोड़ने उनके कमरे में क्यों गए. गुलजार नहीं चाहते थे कि बात का बतंगड़ बने. ऐसे में उन्होंने बात टालने की कोशिश की. इससे गुस्साईं राखी ने उनका रास्ता रोक लिया और सवाल पर सवाल पूछने लगीं, जिससे वहां मजमा लग गया. वहां मौजूद होटल के स्टाफ के मुताबिक, इसके बाद दोनों में काफी झगड़ा हुआ और गुलजार ने राखी को बुरी तरह पीटा. बाद में खुद गुलजार होटल के कमरे में नशे में धुत्त मिले थे. यह राखी के लिए उनके जीवन का सबसे बुरा एक्सपीरियंस था.
1973 में दोनों विवाह बंधन में बंधे थे:
साल 1973 में मायानगरी में तीन शादियां सुर्ख़ियों के बायस बनी डिंपल और राजेश ख़न्ना, जया और अमिताभ, राख़ी और गुलज़ार. गुलज़ार तब तक काबिल डायरेक्टर बन चुके थे…और राखी भी अदाकारा के तौर पर अपना मुकाम बना चुकी थीं । हांलाकि राखी की शादी 15 बरस की उम्र में ही हो गई थी.लेकिन बांग्ला फ़िल्म डायरेक्टर अजय विश्वास के साथ राखी का रिश्ता धीरे-धीरे कमज़ोर होता गया.और फ़िर टूट गया.
बंबई में राखी अपनी दोस्त चांद उस्मानी के घर रह रही थीं. वहीं गुलज़ार से उनकी मुलाकात हुई. गुलज़ार के गीतों को सुनकर राखी ने उनके बारे में एक अधेड़, बेपरवाह शख़्स की जो तस्वीर अपनी ज़ेहन में बिठा रखी थी, वो सफेद कुर्ते-पायजामें में क्लीन शेव्ड गुलज़ार को देखते ही टूट गई..और राखी, गुलज़ार के करीब आती गईं.  धीरे धीरे राखी और गुलजार की मुलाकाते बढ़ने लगी.  स्टूडियो में आते-जाते दोनों एक-दूसरे से मिलते रहे.  राखी और गुलजार के बीच कब प्यार के अंकुर फूट गए, यह उन दोनों को भी पता नहीं चला. दोनों की मुलाकातें अक्सर होती थीं. राखी अपने हाथ से बनी बंगाली व्यंजन गुलजार को खिलातीं.
दरअसल, राखी गुलजार के बांग्ला प्रेम से बहुत प्रभावित हुई. गुलजार अब तक फिल्म जगत में एक बड़ा नाम बन चुके थे. लेखक और गीतकार के रूप में ही नहीं, निर्माता-निर्देशक के रूप में भी वे नाम कमा चुके थे. दूसरी ओर राखी ने भी एक एक्ट्रेस के तौर पर में अपनी जगह बना ली थी. शर्मीली ने उन्हें स्टार बना दिया था. पांच साल की दोस्ती के बाद राखी और गुलजार ने शादी का फैसला किया. तब गुलजार राखी के इस बात के मुरीद थे कि राखी को घर सजाना संवारना बखूबी आता है. राखी के हाथ का बना खाना भी उन्हें बहुत पसंद था.  राखी और गुलजार दोनों एक दूसरे को शोनू कहकर बुलाने थे और फिर दोनों ने 1973 में शादी कर ली.
शादी के बाद राखी पति के साथ हनीमून मनाने कश्मीर गई.  कश्मीर से लौटने के बाद वो गुलजार के कोजी होम स्थित फ्लैट में राखी आ गई. शादी के बाद लगभग तीन साल तक राखी गुलजार ने कोई फिल्म नहीं की.  शादी के एक साल बाद ही राखी प्रेगनेन्ट हो गई.  12 दिसंबर 1973 को राखी मां बनी और उनकी गोद में नन्हीं सी परी बोस्की आ गई थी.  बोस्की के आने से राखी की जिंदगी का मौसम बदलना था. लेकिन 1974 में आई एक आंधी ने बसा बसाया घर उजाड़ दिया. गुलजार और राखी के रास्ते अलग हो गए थे.  बेटी मेघना की खातिर राखी और गुलजार ने कभी तलाक नहीं लिया लेकिन कभी साथ भी नहीं रहे.

माता पिता के सम्बन्ध पर मेघना की अपनी राय है:

मेघना कहती हैं कि जब दो लोग आपस में सुख और शांति के साथ रह नहीं सकते, तो बेहतर है कि वो सुकून से अलग-अलग रहें. मेघना आगे कहती हैं कि इस दुनिया में सबको अपने तरीक़े से जीने का हक़ है. मैं कौन होती हूं उनकी लाइफ में दखल देने वाली. बचपन में मैंने अपने माता-पिता के साथ कुछ वक़्त बिताएं हैं. वो समय बहुत ही अजीब थे. हालांकि बहुत जल्दी दोनों अलग हो गए थे, फिर भी मुझे कभी इस बात का एहसास नहीं हुआ कि मेरे दो घर हैं, क्यों कि दोनों जगह मेरे सारे सामान रखे हुए थे.

मेरी मां और पापा, दोनों अच्छे पैरेंट्स हैं, लेकिन शायद पार्टनर अच्छे नहीं हैं. दोनों का साथ रहना उतनी ही मुश्किल है, जैसे दो धुरी. दोनों अलग-अलग ही सही तरह से रह रहे हैं.

मैं ये जानती हूं कि तकलीफ़ दोनों तरफ़ है. मेरे पापा बेहद नेक और नरम दिल इंसान है. जब वो मेरे बच्चे के साथ समय बिताते हैं तो मैं अपने बचपन की कल्पना करती हूं. मां से अलग होने पर उन्हें भी तकलीफ़ है और मेरी मां को भी. न जानें मैंने कितनी बार पापा को रंगीन कपड़े ख़रीदकर दिए, लेकिन पापा सफ़ेद कुर्ता-पायजामा के बजाय कुछ भी पहनना पसंद नहीं करते. अपनी लाइफ के कोरे पन्नों के साथ वो जीना सीख लिए हैं.

उनकी ज़िंदगी में किसी तरह की रौनक नहीं है. दोनों को मिलाने का प्रयास करने का मतलब था उनकी आत्मा को चोट पहुंचाना, क्योंकि दोनों तरफ़ से मिलने की आस नहीं दिखी कभी. दोनों ने अपने अकेलेपन को काम के बोझ से भर लिया है.

औलाद होने के नाते मुझे कई बार इस बात का एहसास हुआ कि मेरे माता-पिता को एक साथ रहना चाहिए, लेकिन किसी की आत्मा को चोट पहुंचाकर आप अपनी ख़ुशी पूरी नहीं कर सकते.


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