वरिष्ठ भाजपा नेता और केन्द्रीय मंत्री अनंत कुमार का 59 वर्ष की उम्र में कैंसर से निधन

केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार  का 59 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है. वह कैंसर से जूझ रहे थे.  बेंगलुरु में सोमवार को उन्होंने आखिरी सांस ली. भाजपा नेता अनंत कुमार साल 1996 से दक्षिणी बेंगलुरु का लोकसभा में प्रतिनिधित्व करते थे. वह केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के कद्दावर मंत्रियों में से एक थे और उनके पास दो महत्वपूर्ण मंत्रालय थे.

अनंत कुमार लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थे और उनका इलाज चल रहा था. पिछले दिनों उन्हें बेंगलुरु लाया गया था और एक अस्पताल में इलाज चल रहा था. बताया जा रहा है कि उनकी तबीयत में सुधार भी हो रहा था लेकिन अचानक तबीयत फिर खराब हो गई और सोमवार को तड़के देहांत हो गया. अनंत कुमार के परिवार में उनकी पत्नी तेजस्विनी और बेटी ऐश्वर्या और विजेता हैं. अंतिम दर्शन के लिए अनंत कुमार का पार्थिव शरीर बेंगलुरु के नेशनल कॉलेज में रखा जाएगा.  अनंत कुमार के पास दो महत्वपूर्ण मंत्रालय थे. उनके पास साल 2014 से रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय था. साथ ही जुलाई 2016 में उन्हें संसदीय कार्यमंत्री का जिम्मा भी सौंपा गया था. अनंत कुमार का जन्म 22 जुलाई 1959 को बेंगलुरु में हुआ था. उन्होंने केएस आर्ट्स कॉलेज से बीए की पढ़ाई की थी. उसके बाद जेएसएस लॉ कॉलेज से एलएलबी की डिग्री भी हासिल की थी.

केंद्र ने दिवंगत केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार के सम्मान में सोमवार को देश भर में राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुका रखने की घोषणा की है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य अनंत कुमार छह बार सांसद रहे.    22 जुलाई, 1959 को बेंगलुरु में एक मध्यम वर्गीय ब्राह्मण परिवार में जन्मे कुमार ने अपनी शुरुआती शिक्षा अपनी मां गिरिजा एन शास्त्री के मार्गदर्शन में पूरी की जो खुद भी एक ग्रेजुएट थीं. उनके पिता नारायण शास्त्री रेलवे के कर्मचारी थे. कला एवं कानून में स्नातक कुमार के सार्वजनिक जीवन की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहने के कारण हुई. वह एबीवीपी के प्रदेश सचिव और राष्ट्रीय सचिव भी रहे. कुमार ने तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार द्वारा आपातकाल लगाए जाने के खिलाफ प्रदर्शन किया था और करीब 30 दिनों तक वह जेल में भी रहे.

राजनीति में अपने लिए बड़ी संभावनाएं तलाशने के लिए 1987 में कुमार भाजपा में शामिल हुए जहां उन्हें तरह तरह की जिम्मेवारी दी गयी.  प्रदेश सचिव, युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष, महासचिव, आदि पदों पर रहकर पार्टी के प्रति अपनी जिम्मेवारी निभायी. कुमार  उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं जिन्हें कर्नाटक में भाजपा के विकास का श्रेय दिया जा सकता है.

कुमार ने अपना संसदीय करियर 1996 में शुरू किया जब वह दक्षिण बेंगलुरु से लोकसभा में चुने गए. यह निर्वाचन क्षेत्र उनके निधन तक उनका मजबूत गढ़ बना रहा जहां उन्हें लगातार छह बार जीत मिली. 15 वीं लोकसभा का चुनाव जीतने के बाद उन्होंने विभिन्न संसदीय समितियों में पद संभाले और नरेंद्र मोदी नीत सरकार में बतौर संसदीय कार्य मंत्री और केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री रहे.

उनके निधन पर हर दल के नेता ने अपनी श्रद्धांजली दी है. पीएम नरेंद्र मोदी ने लिखा कि मेरे सहकर्मी और दोस्त अनंत कुमार के निधन के बारे में सुनकर मुझे काफी दुख हुआ. वह शानदार नेता थे, जिन्होंने युवा के रूप में राजनीति में कदम रखा और अब तक अत्यंत परिश्रम और करुणा के साथ लोगों की सेवा में लगे थे. उन्हें हमेशा उनके अच्छे कामों के लिए याद किया जाएगा.’

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने लिखा कि केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार के निधन के बारे में सुनकर मुझे दुख हुआ. उनका जाना देश और खासकर कर्नाटक के लोगों के लिए बड़ा झटका है.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने लिखा कि आज सुबह केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार जी के बेंगलुरू में निधन के बारे में जानकर दुख हुआ है. उनके परिवार और मित्रों को मेरी संवेदनाएं. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे. ओम शांति.

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने लिखा कि मेरे मस्तिष्क में अनंत जी के साथ सरकार और संगठन में साथ काम करने की सभी यादें घूम रही हैं. ये यादें हमेशा मेरे साथ रहेंगी. उनका जाना भाजपा के लिए बड़ा नुकसान है. यह मेरे लिए भी व्यक्तिगत तौर पर बड़ी क्षति है.


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