शोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस पर स्पेशल सीबीआई कोर्ट 21 दिसम्बर को फैसला सुनाएगी

शोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस में मुंबई में सीबीआई  की विशेष अदालत 21 दिसंबर को फैसला सुनाएगी. सोहराबुद्दीन शेख को गांधीनगर में पुलिस अधिकारियों ने नवंबर, 2005 में मार गिराया  था. पुलिस के अनुसार  सोहराबुद्दीन शेख एक  आतंकवादी था. मुठभेड़ में सोहराबुद्दीन शेख की पत्नी कौसर बी भी मारी गई थी. दंपति के साथ मौजूद तुलसीराम प्रजापति, जो गवाह भी था, की एक साल बाद हत्या हो गई थी.

जांचकर्ताओं के मुताबिक, यह हत्याएं उन लोगों को चुप कराने के लिए की गई थीं, क्योंकि वे एक ऐसे वसूली रैकेट का हिस्सा थे, जो तीन राज्यों – गुजरात, राजस्थान और आंध्र प्रदेश – की पुलिस ही अपने राजनैतिक आकाओं के लिए चला रही थी.

चार्जशीट के अनुसार 22 नवंबर 2005 के दिन सोहराबुद्दीन शेख अपनी पत्नी कौसरबी और साथी तुलसी प्रजापति के साथ हैदराबाद में था. राजस्थान पुलिस और गुजरात एटीएस की टीम ने तीनों को हैदाराबाद के सांगली से पकड़ा और गांधीनगर के डीशा ले आए, जहां उन्होंने तीनों को एक फार्महाउस पर ले जाकर रखा.

बाद में यहां से पुलिस सोहराबुद्दीन और तुलसी प्रजापति को तो अपने साथ ले गई, लेकिन सोहराबुद्दीन की बीवी कही जाने वाली कौसरबी को यहां एक कमरे में बंद कर दिया गया. फिर 26 नवंबर 2005 को अहमदाबाद के विशाला सर्किल के पास ही स्थित टोल नाके पर सुबह करीब 4 बजे गुजरात एटीएस के मुखिया डीजी वंजारा और राजस्थान के उदयपुर जिले के एसपी और वर्तमान में एसओजी के आईजी दिनेश एम.एन ने इस एनकाउंटर की पूरी कहानी रची.

चार्जशीट के अनुसार इस कहानी में सबसे पहले कांस्टेबल अजय परमार को पुलिस अधिकारियों ने आदेश दिए कि वो गुजरात एटीएस मुख्यालय की पार्किंग में खड़ी एक बाइक लेकर आए, जिसके बाद सोहराबुद्दीन को भी वहीं लाया गया.

एक टीम में शामिल राजस्थान पुलिस के एक कांस्टेबल को कहा गया कि वो मोटरसाइकिल पर बैठकर जाए और अचानक उससे छलांग लगा दे. कांस्टेबल के बाइक से छलांग लगाते ही, पुलिस ने सोहराबुद्दीन को भी चलती कार से धक्का दे दिया. इसके बाद वो सड़क पर गिर गया. बाइक से कूदे कांस्टेबल को भी चोटें आईं, वहीं सोहराबुद्दीन को भी सड़क पर गिरने से चोट लगी.

इतने में ही पुलिस ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से फायर करते हुए सोहराबुद्दीन के सीने में करीब 8 गोलियां उतार दी. पुलिस ने बाद में उसे ​सिविल अस्पताल भी भिजवाया ताकि इस पूरे मामले को एनकाउंटर को रुप दिया जा सके.

सीबीआई का आरोप है कि अब पुलिस को ये डर सता रहा था कि कहीं तुलसी ने सीबीआई के सामने सच बता दिया तो. चार्जशीट के अनुसार ऐसे में पुलिस ने एक और एनकाउंटर की साजिश रची और तुलसी प्रजापति का गुजरात के बनासकांठा जिले में एनकाउंटर कर दिया गया.

ये एनकाउंटर सोहराबुद्दीन एनकाउंटर के ठीक एक महीने बाद हुआ. उस समय बनासकांठा में डीजी वंजारा की पोस्टिंग भी थी. पुलिस ने अपनी सफाई में कहा था कि तुलसी ने अपने एक साथी के साथ मिलकर पुलिस पार्टी की आंखों में मिर्च पाउडर डाल दिया और गोलियां चलाईं, जवाबी कार्रवाई में पुलिस को उसे मारना ही पड़ा.


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