NRI को वोट देने के अधिकार के मसले पर सुप्रीम कोर्ट जनवरी में सुनवाई करेगा

नयी दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि NRI को वोट देने के अधिकार के मसले पर २०१९ के जनवरी में सुनवाई की जायेगी. सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में ये बात लायी गयी कि संसद के विंटर सेशन में इस पर एक बिल लाया जाएगा.

गौरतलब है कि प्रवासी भारतीयों को वोट देने का मसला काफी समय से चला आ रहा है और इस पर तरह तरह के विचार सामने आ रहे हैं. केंद्र सरकार प्रवासी भारतीयों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से मतदान का अधिकार देने के पक्ष में है. पिछले चार सालों से इस बात पर सहमति रही है कि प्रवासी भारतीयों को रक्षाकर्मियों की तरह प्रॉक्सी वोटिंग और ई-बैलेट की सुविधा मुहैया कराने के लिए कानून में बदलाव करने की जरूरत पड़ेगी. इस प्रस्ताव के तहत, प्रवासी भारतीयों को इलेक्ट्रॉनिकली बैलेट पेपर भेजे जाएंगे और उन्हें डाक से निर्वाचन प्रशासन को इन्हें लौटाना होगा.

मुख्य निर्वाचन आयुक्त वीएस संपत ने 2015 में  कहा था कि विदेश मंत्रालय प्रवासी भारतीयों को दूतावासों में जाकर मतदान करने की सुविधा प्रदान करने के खिलाफ है, क्योंकि ऐसा करना काफी मुश्किल होगा. मंत्रालय को कहना था कि कुछ देशों में प्रवासी भारतीयों की संख्या स्थानीय आबादी के बराबर हो सकती है और दूतावास में इस प्रकार की गतिविधि को अंजाम दे पाना आसान नहीं होगा.
लोक सभा ने बिल पर मुहर लगा दी है; अब विंटर सेशन में राज्य सभा में बिल पेश किया जाएगा:
लोकसभा ने रेप्रिजेंटेशन ऑफ द पीपल (अमेंडमेंट) बिल, 2017 पर मुहर लगा दी है. इस बिल में NRI को वोट देने की मंजूरी दी गई है. वोटर लिस्ट में शामिल एनआरआई अपने चुनाव क्षेत्र में किसी को अपनी तरफ से वोट देने के लिए अधिकृत कर सकता है.   अब  बिल को राज्यसभा की मंज़ूरी मिलनी बाक़ी है.  दोनों सदनों से पास होने और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह बिल कानून की शक्ल ले लेगा.  ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का स्टैंड है कि जनवरी में इस बिल पर विचार किया जाएगा.
भाजपा को NRI वोट अपने खाते में जाने की उम्मीद है: 
देश के कुल 543 लोकसभा क्षेत्रों में करीब 1.1 करोड़ NRI  वोट हैं.  हर लोकसभा क्षेत्र में औसतन 21,000 वोट. अगर ये वोट एकमुश्त किसी के खाते में जाते हैं तो चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं. ये NRI  भारत में अपने परिवार को भी प्रभावित कर सकते हैं.  प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी 54 से ज्यादा देशों का दौरा कर चुके हैं. उन्होंने जिन देशों का दौरा किया है, उन देशों में करीब एक करोड़ एनआरआई रहते हैं. प्रधानमंत्री मोदी अपने विदेश दौरों में अकसर NRI को संबोधित करते रहे हैं. भाजपा का अनुमान है कि NRI को  वोट देने का  अधिकार  मिलने से मुख्य फायदा उसी को होगा.

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