किसके खाते में जायेगा खगड़िया,‘नवाब’ महबूब अली कैसर हैं सांसद, राजद भी मजबूत

बिहार का खगड़िया लोकसभा क्षेत्र एनडीए की ओर से रामविलास पासवान की पार्टी लोकजनशक्ति के खाते में है और यहां के सांसद हैं महबूब अली कैसर. महबूब अली कैसर नवाबों के खानदान से तालुल्क रखते हैं और इन्होंने 2014 के चुनाव में राजद के कृष्णा यादव को शिकस्त दी थी. इस बार यह सीट किसके खाते में जायेगी, इसपर अभी भी संशय कायम है, क्योंकि एनडीए ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं, फिर भी ऐसी संभावना जतायी जा रही है कि इस बार भी यह सीट लोजपा के खाते में ही जायेगी. चूंकि महबूब अली स्थानीय उम्मीदवार हैं, इसलिए भी उनकी दावेदारी मजबूत है.

कैसा रहा है इतिहास
खगड़िया लोकसभा सीट पर अगर नजर डालें तो हम पायेंगे कि मतदाताओं की पसंद बदलती रही है. आजादी के बाद जहां कांग्रेस को मतदाताओं ने पसंद किया वहीं इमरजेंसी में जनता पार्टी से नाता जोड़ा. हालांकि इस सीट पर भाजपा ने कभी जीत दर्ज नहीं की है, जबकि मतदाताओं ने कांग्रेस सहित, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, जनता दल, समता पार्टी, जदयू और राजद को भी यहां से जिताया है. हालांकि भाजपा समर्थित उम्मीदवार यानी लोजपा के महबूब अली कैसर यहां से पिछली बार चुनाव जीते हैं. 1957 और 1962 में यहां से कांग्रेस के जियालाल मंडल चुनाव जीते. उनके बाद दो बार संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार यहां से जीते. 1977 में जनता पार्टी के ज्ञानेश्वर प्रसाद यादव ने जीत दर्ज की. 1980 और 1984 में फिर कांग्रेस जीती, जबकि 1989 से 1999 तक यहां से जनता दल और समता पार्टी के उम्मीदवार जीते. 1998 में शकुनि चौधरी यहां से सांसद बने थे जबकि 1999 में रेणु कुमारी सिंह जनता दल की टिकट पर सांसद बनीं. 2004 में राजद के रवींद्र कुमार राणा और 2009 में जनता दल यूनाईटेड के दिनेश चंद्र यादव यहां से चुनाव जीते थे. 2014 में यहां लोजपा और राजद के बीच सीधी टक्कर हुई और लोजपा ने जीत दर्ज की.

छह विधानसभा क्षेत्र है शामिल
खगड़िया लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत छह विधानसभा क्षेत्र आते हैं जिनके नाम हैं – सिमरी बख्तियारपुर जो सहरसा जिले में है, हसनपुर जो समस्तीपुर जिले में है, अलौली, खगड़िया, बेलदौर और परबत्ता यह चारों विधानसभा क्षेत्र खगड़िया जिले में ही आते हैं.

जानें कौन हैं महबूब अली कैसर
महबूब अली कैसर खगड़िया के सांसद हैं और पहले वे तीन बार सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रह चुके हैं. वे बिहार सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. पहले वे कांग्रेस पार्टी के सदस्य थे लेकिन 2014 में टिकट नहीं मिलने पर वे लोजपा में आ गये. वे 2013 तक बिहार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष थे. उनके पिता सलाउद्दीन चौधरी भी बिहार सरकार में मंत्री रहे थे.


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