आशा प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण कार्यशाला: छोटे बच्चों की गृह आधारित देखभाल कार्यक्रम की होगी शुरुआत

राज्य के सभी जिलों में चलाया जायेगा कार्यक्रम

      आशा प्रशिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला का हुआ आयोजन

पटना/ 15 मार्च: राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान में  “Alive & Thrive” (अलाइव एंड थराईव) के सहयोग से शुक्रवार को छोटे बच्चों की गृह आधारित देखभाल पर आशा प्रशिक्षकों की प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गयी. नवजातों को बेहतर देखभाल प्रदान कराने के उद्देश्य से राज्य में आशाओं के द्वारा गृह आधारित देखभाल की जाती है. लेकिन इससे केवल एक माह तक के शिशुओं को ही गृह आधारित देखभाल प्राप्त हो पाती थी. अब इस कार्यक्रम के तहत नवजातों के साथ 15 माह तक के बच्चों को भी गृह आधारित देखभाल प्रदान की जाएगी.

इस अवसर पर राज्य सहायक निदेशक बाल स्वास्थ्य कोषांग विमलेश सिन्हा ने बताया कि एक माह तक के नवजातों को विशेष देखभाल प्रदान करने के लिए चलाए जाने वाले नवजात  गृह आधारित देखभाल कार्यक्रम के नाम में परिवर्तन कर अब इसे छोटे बच्चों की गृह आधारित देखभाल कार्यक्रम के नाम से राज्य के सभी जिलों में चलाया जायेगा. शुरूआती सत्र में इस कार्यकम की शुरुआत राज्य के 13 जिलों से की जाएगी. जिसमें गया, बांका, बेगूसराय, औरंगाबाद, सीतामढ़ी, अररिया, जमुई, खगड़िया, कटिहार, नवादा, मुज्ज़फरपुर, सीतामढ़ी.शेखपुरा एवं पूर्णिया जिला शुरूआती सत्र में शामिल होंगे. बौनेपन की स्थिति, पाँच वर्ष तक के शिशुओं में मृत्य दर एवं कम वजन वाले बच्चे की स्थिति के आधार पर जिलों का चयन किया गया है. उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों की गृह आधारित देखभाल के माध्यम से छोटे बच्चों के साथ भी माताओं को भी शामिल किया जाएगा एवं माताओं को भी बच्चे की देखभाल पर जानकारी दी जाएगी. बच्चों को कृमि से मुक्त करने के लिए माताओं को एल्बेनडाजोल की दवा देकर इसके सेवन के विषय के विषय में जानकारी दी जाएगी. इस कार्यक्रम के तहत 6 माह तक बच्चों द्वारा सिर्फ स्तनपान एवं 6 माह के बाद अनुपूरक आहार के साथ 2 साल तक स्तनपान जारी रखने की आदत में सुधार करने का विशेष बल दिया जायेगा.

कार्यक्रम प्रबंधक अलाइव एंड थराईव डॉ. अनुपम श्रीवास्तव ने बताया कि छोटे बच्चों की गृह आधारित देखभाल का मुख्य उद्देश्य शिशु मृत्यु दर एवं बीमारियों में कमी लाना एवं छोटे बच्चों में पोषण की स्थिति, विकास एवं बच्चों में प्रारंभिक विकास में सुधार लाना है. इसके अंतर्गत 2 माह से लेकर 15 माह तक के बच्चों को आशाओं द्वारा घर-घर जाकर देखभाल प्रदान की जाएगी. इस देखभाल में पोषण, स्वास्थ्य, बच्चे का विकास एवं स्वच्छता पर ध्यान दिया जायेगा. पोषण में स्तनपान के अलावा अनुपूरक आहार एवं आयरन फोलिक एसिड का सेवन सुनश्चित कराना शमिल होगा. स्वास्थ्य में पूर्ण टीकाकरण एवं बच्चों में ओआरएस के माध्यम से डायरिया नियंत्रण के साथ बच्चों में साफ़-सफाई पर जोर दिया जाएगा.

इस दौरान जपाइगो से अनिल प्रभंजन एवं डॉ. पल्लवी सिन्हा, रेणु रानी एवं अखिलेश उपाध्याय के साथ राज्य स्तरीय अन्य स्वास्थ्य अधिकारी उपस्थित थे.


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