आज से 110 साल पूर्व भागलपुर मे उठी थी बंगाल से बिहार को अलग करने की आवाज़: बिहार दिवस पर विशेष

मुकुटधारी अग्रवाल

बंगाल प्रेसीडेंसी से बिहार को अलग करने की आवाज़ 9 और 10 अप्रैल 1909 ई मे यहाँ आयोजित बिहार प्रांतीय राजनीतिक सम्मेलन मे भी उठी थी.  सम्मेलन के स्वागताध्यक्ष भागलपुर के प्रसिद्ध कोग्रेसी नेता बाबू दीपनारायण सिंह थे और सम्मेलन की अध्यक्षता पटना के डॉ सच्चिदानंद सिन्हा कर रहे थे. इस सम्मेलन मे भाग लेने के लिए विशेष रूप से कॉंग्रेस के राष्ट्रीय नेता गोपाल कृष्ण गोखले और खरे आए थे.

इसके अतिरिक्त राज्य के कोने -कोने से कई ज़िलो के कोंग्रेसी नेताओ और कार्यकर्ताओ ने भाग लिया था , इस सम्मेलन के निर्वाचित अध्यक्ष डॉ सिन्हा ने अपने अध्यक्षीय भाषण मे बंगाल प्रेसीडेंसी से बिहार को अलग कर इसे ब्रिटिश भारत का नया राज्य बनाने के कारणो पर विस्तार से प्रकाश डाला था और सम्मेलन मे एक प्रस्ताव पारित कर डॉ सिन्हा और पटना के हसन इमाम को बिहार को अलग सूबा बनाने की दिशा मे उचित कदम उठाने के लिए अधिकृत किया गया.

1910 ई मे डॉ सिन्हा भी खुद लेजिस्लेटिव काउंसिल के सदस्य निर्वाचित हुये और उन्होने बिहार को बंगाल से अलग करने की आवाज़ बहुत प्रभावकारी ढंग से न केवल उठाया अपितु वाइसराय सहित ब्रिटेन के किंग जार्ज पंचम् और ब्रिटिश प्रधान मंत्री को सारे तथ्यो से अवगत कराते हुये ज्ञापन भी भेजा.  इस कार्य मे उन्हे हसन इमाम और भागलपुर के दीप बाबू का पूरा सहयोग मिला.  परिणाम यह हुआ कि जब दिसंबर 1911 को किंग जार्ज पंचम सपत्नीक भारत आए तब उन्होने दिल्ली दरबार के मौके पर बिहार को बंगाल प्रेसीडेंसी से अलग कर बिहार राज्य के गठन की विधिवत घोषणा की. बिहार मे उड़ीसा को भी शामिल किया गया.

बिहार के प्रख्यात पत्रकार महेश नारायण के पत्र ‘बिहार हेरेल्ड (जो कुछ समय से लिए भागलपुर से भी प्रकाशित हुआ था ) और ‘बिहारी ‘ पत्र की बंगाल से बिहार को अलग करने की मांग को लेकर प्रबल जनमत तैयार करने मे महती भूमिका थी.  इसके अलावा महेश नारायण ने डॉ सिन्हा के साथ मिलकर वर्ष 1906ई मे ‘बंगाल का विभाजन और बिहार का गठन ” पुस्तक का प्रकाशन भी किया था
लेकिन यह बहुत खेद का विषय है कि बिहार निर्माता डॉ सच्चिदानंद सिन्हा और पत्रकार महेश नारायण और भागलपुर के प्रसिद्ध नेता बाबू दीप नारायण सिंह के योगदान को हम सभी विस्मृत कर बैठे हैं.


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