’मिनी चितौड़गढ़’ औरंगाबाद में फिर राजपूतों की चलेगी या कुशवाहा, यादव भी दिखायेंगे दम?

पटना : औरंगाबाद बिहार का ऐसा संसदीय क्षेत्र है, जहां पहले चरण के चुनाव में मतदान होना है. यह सीट कांग्रेस का गढ़ रहा है लेकिन बिहार में महागठबंधन होने के कारण यह सीट जीतन राम मांझी की पार्टी ‘हम’ के खाते में चली गयी है. यहां से ‘हम’ प्रत्याशी उपेंद्र प्रसाद मैदान में हैं. वहीं एनडीए की ओर से यहां भाजपा सांसद सुशील कुमार सिंह ताल ठोंकने के लिए तैयार हैं. वे पहले भी यहां के सांसद रह चुके हैं. 2009 के चुनाव में उन्होंने जदयू और फिर 2014 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीता था. ऐसी चर्चा थी कि कांग्रेस यहां से अपने उम्मीदवार निखिल कुमार को उतारेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया.

ज्ञात हो कि औरंगाबाद नक्सल प्रभावित क्षेत्र है और इस जिले ने कई खूनी संघर्ष देखे हैं. राजपूत और भूमिहारों के वर्चस्व वाला यह क्षेत्र कभी ‘मिनी चितौड़गढ’ कहा जाता था और यह कांग्रेस का गढ़ था. यहां से अबतक सबसे ज्यादा सात बार पूर्व मुख्यमंत्री सत्येंद्र नारायण सिन्हा विजयी हुए . 1989 से पहले औरंगाबाद पर सत्येंद्र नारायण सिन्हा का कब्जा था, लेकिन 1989 के चुनाव में उन्हीं के सिपहसालार रहे रामनरेश सिंह उर्फ लूटन सिंह ने जनता दल के उम्मीदवार के रूप में ताल ठोकी और सत्येंद्र नारायण की पुत्रवधू श्यामा सिंह को शिकस्त दी. औरंगाबाद सीट पर वर्तमान में भाजपा का कब्जा है और लूटन सिंह के पुत्र सुशील सिंह सांसद हैं.

औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्र में छह विधानसभाएं शामिल हैं, जिनमें 1. कुटुंबा 2. औरंगाबाद 3. रफीगंज 4. गुरुवा 5. इमामगंज और 6. टिकारी शामिल है. 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां वोटरों की संख्या 15 लाख 89 हजार 393 थी, जिसमें से केवल 9 लाख 82 ,264 थी। औरंगाबाद की कुल जनसंख्या 26,08,260 है जिसमें से 93 प्रतिशत आबादी गांवों में और 6 प्रतिशत लोग शहरों में निवास करते हैं. परिसीमन के बाद औरंगाबाद का जातीय समीकरण कुछ बदला है और आज यहां गैरराजपूत भी मजबूत चुनौती खड़ी कर रहे हैं. इस इलाके में कुशवाहा जाति बड़े पैमाने पर है. राजनीतिक जानकारों की मानें तो औरंगाबाद संसदीय क्षेत्र में यादव, कुशवाहा और राजपूत की आबादी लगभग बराबर हो गयी है और मुस्लिम लोगों की स्थिति भी मजबूत है, ऐसे में यहां इस बार पासा पलट भी सकता है. वैसे इस बार एनडी और महागठबंधन दोनों ने ताकत लगायी है, अब देखना यह है कि ऊंट किस करवट बैठता है.


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