बांका में नीतीश श्रेयसी सिंह को टिकट दे रहे थे, पर अब श्रेयसी सिंह अपनी माँ के लिए वोट मांगने में जुटीं; बांका त्रिकोणीय मुकाबले के लिए तैयार

बांका लोकसभा की तस्वीर दिलचस्प होती जा रही है. पूर्व सांसद पुतुल कुमारी की बेटी नेशनल शूटिंग चैंपियन श्रेयसी सिंह अब अपनी माँ के पक्ष में वोट मांगने के लिए मैदान में उतर गयी हैं.मां के चुनाव प्रचार की कमान श्रेयसी संभाल रही हैं और वो इलाके के गांव-गांव में घूम कर अपनी मां के लिए वोट मांग रही है. ज्ञात हो कि जदयू ने पुतुल कुमारी को मनाने के लिए पहले उनकी बेटी 2018 के कामनवेल्थ गेम्स के गोल्ड मेडलिस्ट शूटर श्रेयसी सिंह को यहां से उम्मीदवार बनाने की पेशकश की थी जिसे वह नहीं मानी, तब जदयू ने गिरधारी यादव को टिकट दिया है. गौरतलब है कि बिहार में एनडीए में सीटों का जो समझौता हुआ उसके अनुसार 17-17 सीटों पर भाजपा और जदयू चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि छह सीट लोजपा को मिली है.

हालांकि एनडीए ने जातीय समीकरण और दबंगों के प्रभाव सबकुछ को मैनेज करने की कोशिश की है, फिर भी कई जगहों पर असंतोष के बीच फूट पड़े हैं. पुतुल कुमारी पूर्व केंद्रीय मंत्री और बांका के तीन बार सांसद रहे दिग्विजय सिंह की पत्नी हैं. उनका इलाके में काफी प्रभाव था. साल 2010 में दिग्विजय सिंह के निधन के बाद उनकी पत्नी पुतुल कुमारी ने राजनीतिक विरासत संभाली है. हालांकि पुतुल कुमारी ने यह भी कहा है कि वो बीजेपी छोड़ नहीं रही हैं बल्कि अपनी जीत के साथ वो पार्टी लीडरशिप को ही मज़बूत करेंगी. बांका में दूसरे चरण में लोकसभा का चुनाव होगा. पुतुल कुमारी पिछला लोकसभा चुनाव आरजेडी के जयप्रकाश यादव दस हज़ार वोट से हार गई थीं. इसके पहले बांका लोकसभा उपचुनाव में पुतुल कुमारी बतौर निर्दलीय प्रत्याशी जीती थीं.

इस बार बिहार की बांका लोकसभा सीट से जनता दल युनाइटेड के टिकट से गिरिधारी यादव, राष्ट्रीय जनता दल के टिकट से जय प्रकाश नारायण यादव, बहुजन समाज पार्टी से मोहम्मद राफिक आलम, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया से कैलाश प्रसाद सिंह, भारतीय दलित पार्टी से नीलू देवी, भारतीय मोमिन फ्रंट से फेसल अंसारी और झारखंड मुक्ति मोर्चा से राजकिशोर प्रसाद चुनाव लड़ रहे हैं.
बांका लोकसभा सीट से 2014 के चुनाव में आरजेडी प्रत्याशी जय प्रकाश नारायण यादव को जीत मिली थी. उन्होंने 2 लाख 85 हजार 150 वोट हासिल किए थे और करीबी प्रत्याशी पुतुल कुमारी को हराया.  इस चुनाव में पुतुल कुमारी को 2 लाख 75 हजार 6 वोट प्राप्त हुए थे. प्रकाश नारायण यादव को 31.71 फीसदी और पुतुल कुमारी को 30.58 प्रतिशत वोट मिले थे.

2011 की जनगणना के अनुसार बांका संसदीय क्षेत्र की कुल जनसंख्या 20 लाख 34 हजार 763 है. इसका प्रशासनिक प्रभाग भागलपुर मंडल में आता है. बांका संसदीय क्षेत्र में कुल छह विधानसभा सीटे हैं, जिनमें सुल्तानगंज, अमरपुर, धोरैया, बांका, कटोरिया और बेलहर विधानसभा सीटें आती हैं. धोरैया विधानसभा सीट अनुसूचित जाति (एससी) और कटोरिया विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए सुरक्षित है. बिहार के बांका जिले में एसटी की आबादी 75 हजार से ज्यादा है.

1957 में अस्तित्व में आया बांका लोकसभा क्षेत्र समाजवादियों का गढ़ रहा है. बांका की पहली सांसद कांग्रेस की शकुंतला देवी बनी थी. 1967 में भारतीय जनसंघ के बीएस शर्मा बांका के सांसद बने थे.  1971 और 1977 में समाजवादी नेता मधु लिमये यहां से सांसद चुने गए. 1998,1999 और 2009 में दिग्विजय सिंह ने बांका लोकसभा का नेतृत्व किया.

बांका लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली छह विधानसभा सीटों में से चार पर वर्तमान समय में जदयू का कब्जा है. इसमें धोरैया में मनीष कुमार, अमरपुर में जनार्दन मांझी, बेलहर में गिरधारी यादव एवं सुल्तानगंज में सुबोध राय विधायक हैं. इसके अलावा बांका सीट पर भाजपा के रामनारायण मंडल विधायक हैं जबकि कटोरिया विधानसभा क्षेत्र से राजद की स्वीटी सीमा हेम्ब्रम विधायक चुनी गई हैं.  2008 में नए परिसीमन में सुल्तानगंज बांका लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा बना.

बांका से जदयू ने गिरधारी यादव को बनाया उम्मीदवार

जदयू ने बांका से गिरधारी यादव को टिकट दिया है, जबकि राजद ने सीटिंग एमपी जयप्रकाश यादव को. भाजपा उम्मीदवार गिरधारी यादव वर्तमान में बांका जिला के बेलहर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं. वे यहां से दो बार सांसद भी रह चुके हैं एक बार राजद और एक बार जदयू की टिकट पर. 58 वर्षीय गिरधारी यादव का ज्यादा समय मध्यप्रदेश में बीता है. उन्होंने कानून की पढ़ाई भी की है. वे काफी समय तक राजद से जुड़े रहे हैं. वहीं जयप्रकाश यादव राजद के शीर्ष नेताओं में शामिल हैं और राजद सुप्रीमो लालू यादव के खास माने जाते हैं.

बांका त्रिकोणीय मुकाबले के लिए तैयार

इस बार बांका लोकसभा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला के पुरे आसार हैं. एक तरफ राजद का अपना वोट बैंक जयप्रकाश यादव के साथ है, तो वहीँ इसी वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश में जदयू ने बतौर जदयू उम्मीदवार गिरधारी यादव को उतार दिया है. ऐसे में पुतुल कुमारी के समर्थक उम्मीद लेकर चल रहे हैं कि पिछ्ला चुनाव 10,000 वोटों से हारने वाली पुतुल देवी अपने समर्थकों, इलाके में दिग्विजय सिंह का नाम, बेटी श्रेयसी सिंह के स्टार पावर के बलबूते इस बार जीत हासिल कर सकती हैं.

स्वर्गीय दिग्विजय सिंह बांका के दिग्गज नेता रहे हैं, पर दिग्विजय सिंह और नीतीश कुमार के बीच सम्बन्ध ख़राब हो गए थे क्योंकि नीतीश कुमार को शक था कि उनके और जॉर्ज फर्नांडीज़ के बीच सम्बन्ध ख़राब होने के लिए दिग्विजय सिंह जिम्मेवार थे. 2009 में नीतीश कुमार ने दिग्विजय सिंह को इस आधार पर टिकट नहीं दिया कि 2008 के परिसीमन के बाद बांका सीट राजपूत उम्मीदवारों के लिए ठीक नहीं. पर दिग्विजय सिंह निर्दलीय चुनाव लड़कर चुनाव जीत गए.

2014 में मोदी लहर के बावजूद भाजपा के टिकट पर लड़ रहीं पुतुल कुमारी राजद के जयप्रकाश यादव से 10,000 वोटों से चुनाव हार गयीं. इस बार भाजपा से टिकट नहीं मिलने के कारण पुतुल कुमारी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं. जब भाजपा ने उनसे अपनी उम्मीदवारी वापस लेने को कहा तो पुतुल कुमारी ने इंकार कर दिया। इस पर भाजपा ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया. भाजपा को संदेह है कि भाजपा के कैडर इस बार कहीं एनडीए के उम्मीदवार गिरधारी यादव के बजाय पुतुल कुमारी को न समर्थन दे दें.

 

इस लोकसभा चुनाव में आदिवासियों के एकमुश्त वोट निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं. इस वोट बैंक पर तीनों प्रत्याशियों की नज़र है, जो इस वोट बैंक को साध लेगा, वह फिनिशिंग लाइन तक पहुंचेगा.

 


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