परिपक्व भारतीय जनमत निकट भविष्य में चुनावी घोषणापत्र को राजनीतिक दलों के गले की फांस बनाएगा !!

बालेन्दुशेखर मंगलमूर्ति

आज भाजपा भी घोषणापत्र जारी करेगी. कांग्रेस पहले कर चुकी है. और कांग्रेस ने 72,000 रूपये भारत की गरीब जनता के खातों में डालने का दावा कर डाला है. विजन डॉक्यूमेंट तो है नहीं इलेक्शन मैनिफेस्टो, तो कैसे करेंगे का मुद्दा अमूमन डिटेल में डिसकस नहीं किया जाता है. भाजपा ने कांग्रेस के घोषणा पत्र को ढकोसला पत्र कहकर भर पेट आलोचना की. स्वाभाविक ही है, भाजपा के मुंह से तारीफ़ नहीं निकलनी थी. भाजपा के घोषणा पत्र पर कांग्रेस के मुंह से भी नहीं निकलेगी.

कई लोग घोषणा पत्र के महत्त्व पर सवाल खड़े करते हैं. कुछ नहीं हैं, चुनावी स्टंट हैं. कभी घोषणा पत्र पर अमल नहीं किया जाता. एक पक्ष कह सकता है कि घोषणा पत्र एक हिंट देता है कि अगर फलां दल की सरकार बनेगी, तो किन मुद्दों पर जोर रहेगा. कई कहते हैं कि घोषणा पत्र सत्ता में आने के लिए जनता को लुभाने की चीज है. अभिलाषा, आकांक्षा पत्र है. पर जनता के लिए नहीं. खुद के लिए. सबको खुश करने के लिए सब कुछ वायदा करने का नाम है इलेक्शन मैनिफेस्टो.

दोनों बातें अपनी जगह अहमियत रखती हैं, और किसी भी बात को पूरी तरह खारिज नहीं कर सकते. सरकार में आने के बाद मैनिफेस्टो पर काम हुआ है, हालाँकि पूरी तरह से नहीं.

तो फिर इलेक्शन मैनिफेस्टो का क्या महत्व है? मेरे ख्याल से इलेक्शन मैनिफेस्टो का महत्त्व भविष्य के लिए है. और इसका महत्त्व डेमोक्रेसी के परिपक्व होने से जुड़ा है. जब जनता परिपक्व होगी और सत्ता धारी दल को कोर्ट में घसीटेगी वायदे पुरे नहीं करने के लिए और तमाम दलों को कोर्ट में घसीटेगी पुरे न हो सकने लायक वायदे करके जनता को बडगलाने के लिए.
ये कब होगा? ये होगा आने वाले वक़्त में. जैसे जैसे सरकारों की नाक में RTI दम करेगा, लोग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होते जाएंगे तो ये दौर आएगा.

हालाँकि सोशल मीडिया बुरी तरह ध्रुवीकरण का शिकार  (heavily politicized) और opinionated पब्लिक की ओर इशारा करता है, शायद ये हो भी रहा है, पर ट्रेडिशनल पोलिटिकल साइंस का विजडम हमें बताता है कि दलों के समर्थक चुनाव नहीं जीताते, बल्कि दो परस्पर विरोधी दलों के समर्थकों के बीच मिडिल ग्राउंड पर खड़ा पब्लिक ओपिनियन निर्णायक फैक्टर होता है, इस मिडिल ग्राउंड पर खड़े जनमत को प्रभावित करने की जंग है सारा कैंपेनिंग. जिसका हिस्सा है इलेक्शन मैनिफेस्टो.

इलेक्शन मैनिफेस्टो को आने वाले वक़्त में राजनीतिक दलों के नाक में नकेल की तरह इस्तेमाल करेगा इसी मिडिल ग्राउंड पर खड़ा पब्लिक ओपिनियन. जिसे आने वाले वक़्त में भी फर्क नहीं पडेगा कि फलां दल धर्म का इस्तेमाल करके पब्लिक ओपिनियन को polarise कर रहा रहा है, तो चिलां दल पैसे का लोभ देकर। इस मिडिल ग्राउंड पर खड़ा वोटर, जो अपना पर्सपेक्टिव नहीं खोयेगा, वही इलेक्शन मैनिफेस्टो का महत्त्व भारतीय जनतंत्र में स्थापित करेगा.


[jetpack_subscription_form title="Subscribe to Marginalised.in" subscribe_text=" Enter your email address to subscribe and receive notifications of Latest news updates by email."]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.