मैंने चारा घोटाला नहीं किया,मैंने तो चारा घोटाला एक्सपोज किया, जाँच करवाई: लालू यादव

बालेन्दुशेखर मंगलमूर्ति

लालू यादव की आत्मकथा बाज़ार में है. गोपालगंज से रायसीना तक नाम से. अपनी इस किताब ने लालू यादव के अपने जीवन से जुड़े कुछ विवादों पर हलकी रौशनी डाली है. किताब महज 200 पेज की है. लालू यादव का जिस तरह का लंबा और बेहद प्रभावशाली राजनीतिक हस्तक्षेप रहा बिहार और साथ ही केंद्र की राजनीति में, इसे देखते हुए इस किताब को कम से कम 600 पेज की होनी चाहिए थी. छोटी किताब होने के चलते कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर कलम सरसरी अंदाज़ में चली है और पर्याप्त गहराई नहीं आ पायी है. आत्मकथा लेखन में पत्रकार नलिन वर्मा ने सहयोग किया है और उनका नाम किताब के कवर पर है. लालू यादव की राजनीतिक यात्रा काफी कम उम्र में शुरू हो गयी थी. वे पटना यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन के पहले प्रेजिडेंट थे, उनके साथ सुशील मोदी जनरल सेक्रेटरी बने, और रविशंकर प्रसाद सेक्रेटरी. वे 1977 में ही छपरा लोकसभा सीट से चुनाव जीत गए थे. महज 29 साल की उम्र में. वे जेपी मूवमेंट के सबसे बड़े छात्र नेता थे. हालांकि 1980 में वे लोकसभा चुनाव हार गए, पर सोनपुर विधान सभा से बिहार विधान सभा चुनाव जीत गए.

उन्होंने अपनी जीवनी में जिक्र किया है कि वे शुरू से संघ के निशाने पर थे. सुशील मोदी का लालू प्रेम उस समय शुरू हुआ, जो आजतक चल रहा है. सुशील मोदी को जब मै लालू यादव की शिक्षा पर सवाल करते हुए सुनता हूँ, तो मुझे हंसी आती है. क्योंकि सुशील मोदी स्वीकार करते हैं कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वे ग्रेजुएशन का एग्जाम पास कर पाएंगे, पर वे पास कर गए. अब कैसे कर गए, उन्होंने इसके लिए क्या ख़ास किया? इसका जिक्र उन्होंने नहीं किया, तो ऐसे में हम बस अनुमान ही लगा सकते हैं. पर जब मै लालू यादव की शिक्षा को बारे में सोचता हूँ, तो तारीफ़ करता हूँ. वे अपने परिवार, अपने गांव के पहले युवक थे, जिन्होंने मेट्रिक किया. पर वे यही रुके नहीं. बल्कि पोलिटिकल साइंस में एमए किया और फिर एलएलबी किया. गांव से निकले युवक के लिहाज से ये असाधारण उपलब्धि कही जायेगी. क्योंकि गांव से निकले इस युवक को खुद को मोटीवेट करना था. कोई ऐसा उदाहरण सामने नहीं था. मेरे पिता लालू यादव के फैन थे. मेरे पिता की कहानी भी ऐसी ही है. वे अपने परिवार और गांव से पहले मेट्रिक थे. फिर वे अपनी मेहनत और लगन से इंग्लिश के प्रोफ़ेसर बने. तो मेरे पिता लालू यादव के संघर्ष की तारीफ़ किया करते थे. तो लालू यादव अच्छी तरफ शिक्षित व्यक्ति कहे जाएंगे.


लालू यादव ने अपनी आत्मकथा में इसका जिक्र किया है कि सुशील मोदी और रविशंकर प्रसाद को उनसे तकलीफ होती थी और वे छात्र आंदोलन में लालू यादव के बढ़ते कद से परेशान रहते थे. एक बार वे दोनों जेपी के पास पहुँच गए शिकायत लेकर कि लालू यादव चंदे से एकत्र राशि को अपने लिए इस्तेमाल करते हैं और उन पैसे से शराब पीते हैं. जेपी ने लालू यादव को बुलाया. लालू यादव दोनों की धुर्तई समझ गए. उन्होंने कहा: बाबूजी, चंदा के पैसे अपने लिए खर्च करने का आरोप एकदम गलत है, और शराब मै नहीं पीता. हाँ, कभी कभी ताड़ी पी लेता हूँ. उस दिन दोनों की चालाकी असफल हो गयी.

चारा घोटाला में उन्हें फंसाया गया राजनीतिक षड्यंत्र के तहत:

लालू यादव ने अपनी छोटी किताब में इस बात का दावा किया है कि चारा घोटाला उन्होंने नहीं किया और इसका आरोपी उन्हें बनाना राजनीतिक षड्यंत्र था. इस बारे में लिखते हुए लालू यादव कहते हैं: तत्कालीन वित्त सचिव वी एस दुबे ने उनका ध्यान इस बात की ओर खींचा कि छोटानागपुर और संथालपरगना के कुछ जिलों में पशुपालन विभाग से बजट से ज्यादा पैसे निकाले जा रहे हैं. जब मैंने जांच करवाई तो पता चला कि कांट्रेक्टर और सप्लायर सरकारी अधिकारीयों के सहयोग से पिछले पंद्रह सालों से 1977 -78 से ऐसा कर रहे थे और यह पिछले दस मुख्यमंत्रियों के काल से चल रहा था. और ये समस्या गंभीर हो गया 1981 -82 में जब ट्रेज़री से बजट से काफी ज्यादा पैसे निकाल लिए गए. उस समय जगन्नाथ मिश्रा मुख्यमंत्री थे. उस समय से हर साल पैसे के गबन का खेल चल रहा था. मैंने तुरंत इस मुद्दे पर कैबिनेट समिति की मीटिंग बुलाई. मैंने वित्त सचिव के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों को तुरंत जांच का आदेश दिया. पश्चिम सिंघभूम और रांची के डीएम ने बड़ी गड़बड़ी पकड़ी. मैंने जांच का आदेश दिया. कुल 41 FIR दर्ज किये गए. मैंने एक जुडिशल कमीशन भी जांच के लिए सेट अप किया. मुझे ख़ुशी थी कि एक बड़े षड्यंत्र का फर्दाफाश कर दिया था. लेकिन भाजपा ने सीबीआई जांच होने से पहले ही मुझ पर आरोप लगाना शुरू कर दिया. भाजपा ने एक बुकलेट भी छाप दिया “चारा चोर” के नाम से, जिसमे मुझे भैंस पर बैठे दिखाया गया और उसमे भैंस चारा खा रही थी. भाजपा के शुशील मोदी और समता पार्टी के ललन सिंह और कुछ अन्य लोगों ने कोर्ट में PIL दाखिल कर दिया.

 


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