महिलाओं में सिर्फ सेक्स अपील नहीं ढूंढ़ें, सवाल उनकी dignity का है…

रजनीश आनंद

चुनावी मौसम में जहां सभी राजनेता एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं और यह तय करके बैठे हैं कि अगर तुम एक मग कीचड़ मेरी ओर फेंकोगे तो मैं एक बाल्टी उड़ेल दूंगा, इस दौर में शायद एक बात नोटिस नहीं की जा रही है, जिसकी ओर मैं ध्यान दिलाना चाहती हूं.

इधर कुछ दिनों से सोशल मीडिया में एक पीली साड़ी वाली महिला की तसवीर वायरल की जा रही है. आज देखा कि पीली के साथ-साथ अब नीली साड़ी वाली महिला भी छाई हुई हैं. तसवीर में खास बात यह है कि दोनों महिला चुनावी ड्‌यूटी पर हैं और चूंकि अधिकांशत: महिलाओं में सौंदर्यबोध होता है और यह दोनों महिलाएं उस गुण से परिपूर्ण हैं, तो वे सुंदर नजर आ रही हैं.

गौरतलब है कि दोनों महिलाएं चुनाव ड्‌यूटी पर थीं और अपने-अपने इलाके में चुनाव करवाने जा रही थीं. पीली साड़ी वाली महिला का रीना द्विवेदी हैं जो लखनऊ में कार्यरत हैं, वहीं दूसरी महिला मध्यप्रदेश की हैं और चुनाव ड्‌यूटी पर थीं.
लेकिन सवाल यह है कि इन दोनों महिलाओं की तसवीर को जिस तरह से वायरल किया गया, वह हमारे समाज के चरित्र का सूचक है. वह समाज जो औरत को महज बिस्तर की शोभा मानता है. इस तसवीर का वायरल होना उसी चरित्र का चेहरा आईने में दिखाने जैसा है. सोशल मीडिया में इन तसवीरों पर जैसे कमेंट आ रहे हैं और चौक-चौराहों और दफ्तरों पर जैसी बयान बाजी हो रही है, जैसे चटकारे लिए जा रहे हैं, जी करता है कि ‘आक थू’ करूं, ऐसे समाज पर.मीडिया भी टीआरपी के चक्कर में इन महिलाओं की तस्वीर छाप रहा है इंटरव्यू कर रहा है,मुद्दे नहीं हैं इनके पास.

चुनाव के दौरान कई ऐसी तसवीरें सामने आयीं, जो लोकतंत्र की खूबी को बताते थे, जब विकलांग, वृद्ध, फर्स्ट टाइम वोटर, महिलाएं वोट देने आयीं, लेकिन तसवीर वो वायरल हुई, जिसमें इन्हें सेक्स अपील नजर आया. अरे हां, मेरे ऐसे कई शुभचिंतक हैं, जिन्हें लगेगा कि महिला ने आधे-अधूरे कपड़े पहने होंगे तो उन्हें जानना चाहिए कि महिला ने साड़ी पहनी है और दूसरी महिला भी पूरे कपड़े में है.

यह एक उदाहरण है महिलाओं के प्रति सोच का. दूसरा उदाहरण देखिए. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी चुनावी मैदान में हैं. वो चुनाव भले ना लड़ रही हों, लेकिन कांग्रेस की स्टार प्रचारक हैं. हमारे समाज में इस महिला की चर्चा उसके राजनीतिक ज्ञान पर कम होती है, इस बात पर ज्यादा होती है कि वह तो अब 47 साल की हो गयी. अब क्या करेगी? कुछ साल पहले आ जाती राजनीति में तो शायद कुछ हो जाता. अब तो एक्पायरी डेट आ गयी है. ऐसे लोगों की सोच पर मुझे तरस आती है. क्या प्रियंका गांधी इसलिए नाकाबिल हो गयीं क्योंकि वह 47 साल की है, उनके भाई तो 49 साल के हैं, कभी उनकी उम्र को लेकर तो यह चर्चा नहीं हुई कि उनका एक्पायरी डेट आ गया है. दरअसल यह हमारे पुरुषप्रधान समाज का चेहरा है. इसे औरतों को ही समझना होगा. खुद को इस्तेमाल ना होने दें.

पुरुषों में अगर कामेच्छा है, तो महिलाओं में भी है, लेकिन उसका इतना अभद्र प्रदर्शन किसी कि वह किसी की dignity पर चोट करे, घोर आपत्तिजनक है और मैं इसका विरोध करती हूं. अरवल और दिल्ली जैसे गैंगरेप इसी तरह की सोच का परिणाम हैं और आये दिन हमारे समाज में ऐसी घटनाएं हो रही हैं. मेरे पोस्ट पर कोई यह आकर कमेंट ना करें प्लीज कि भारत में देवी पूजा की व्यवस्था है और सभी लड़कियों को देवी माना जाता है. क्योंकि सच्चाई यह है कि दुर्गा पूजा पंडाल के पीछे भी रेप की खबर मैं बना चुकी हूं. रेप की खबर जब लिखती हूं तो कई बार टूटती हूं और सोचती हूं कि क्या कभी इस समाज में एक स्त्री को देह के अतिरिक्त भी कुछ समझा जायेगा.

(फेसबुक वाॅल से साभार)


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