अलवर गैंगरेप केस : कब तक और क्योंकर चुप रहें हम?

रजनीश आनंद

बात उन दिनों की है जब मैं इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बीए की पढ़ाई कर रही थी. हम जिस मकान में रहते थे, उसके मकान मालिक ठाकुर थे. वैसे ज्यादातर हिंदी फिल्मों के ठाकुर के विपरीत छवि थी उनकी, ना तो कड़क मूछें थी, ना लंबा कद. मिलनसार भी थे. उनके घर उनकी एक रिश्तेदार आती थीं, ठाकुर साहब की पत्नी की भाभी थीं. बहुत ही साधारण महिला, एक दिन हमारे साथ बैठी थीं. उस दिन मैंने देखा उस साधारण महिला के अंदर की असाधारण आग को. महिला का नाम याद नहीं है, हम मामी कहते थे उन्हें. वो कहतीं थीं, ठाकुरों के मर्द एक औरत पर नहीं रहते. अब तो जमाना बहुत बदल गया है, फिर भी मेरा पति रात को मेरे साथ और दिन भर घर में काम करने आने वाली औरतों के साथ अपनी भूख मिटाता है. पता नहीं कितनी भूख है इनकी जो मिटती नहीं. इसका बाप तो इससे भी बड़ा अय्याश था. गांव की किसी औरत को नहीं छोड़ा जो खेती का काम करने घर आती थीं. कइयों ने तो बच्चे भी जने, लेकिन कहलाते अभी भी हरिजनों के बच्चे हैं. मां-बाप सब काले बच्चे गोरे. लोग मजाक भी बनाते हैं, सबको पता है, लेकिन बोलेगा कौन? किसकी हिम्मत होगी.

प्रतापगढ़ की रहने वाली उस राजपूत महिला की बात आज भी मेरे कानों में गूंजती है.
कारण यह है कि आज भी हमारे समाज में दलित परिवार की महिलाओं के साथ कमोबेश ऐसा दुर्व्यवहार हो रहा है. कोई दिन ऐसा नहीं जाता जब किसी महिला के साथ रेप की खबर ना आती हो. लेकिन उस पर समाज की नजर तब तक नहीं जाती, जबतक कि हैवानियत की हद ना हुई हो. मीडिया भी इन खबरों तो तभी जगह देता है जब घटना ज्यादा बड़ी हो जाती है. महिला का स्वाभिमान इतना सस्ता है इस देश में. यह संवेदनाशून्य होने की स्थिति है, जिसपर सोचने की जरूरत है. हां, इन घटनाओं से एनसीआरबी का डाटा जरूर समृद्ध हो जाता है. जहां तक मैं देख और समझ पा रही हूं कि दलित समाज की महिलाएं भी इसे अपनी नियति मान बैठी हैं यही कारण है कि कई केस दर्ज भी नहीं होते और अपराधी अगले शिकार की तलाश में रहता है और उसे मिल भी जाता है.

लेकिन अलवर गैंगरेप में जिस तरह महिला ने हिम्मत दिखायी है उसकी प्रशंसा करनी होगी. राजस्थान की दबंग जाति के पांच गुर्ज्जरों ने जिस तरह की हैवानियत उसके साथ की, उसका वीडियो वायरल किया उसके बाद भी महिला ने हिम्मत दिखायी है यह बड़ी बात है.

अलवर गैंगरेप की पीड़िता अपने पति के साथ बाइक पर अपने मायके से वापस जा रही थी, रास्ते में पांच लोगों ने उन्हें रोका और उनके साथ मारपीट की. उसके बाद पति के सामने ही महिला के साथ गैंगरेप किया. तसवीरें खींचीं और वीडियो भी बनाया. घटना 26 अप्रैल की थी. लेकिन केस दर्ज तब हुआ जब चार मई को गैंगरेप का वीडियो वायरल कर दिया. जानकारी के अनुसार उनसे आरोपियों ने पैसे मांगे थे और धमकाया था कि अगर पैसे नहीं दोगे तो वीडियो वायरले कर देंगे. पैसे नहीं मिले तो वीडियो वायरल कर दिया गया. वीडियो वायरल होने के बाद जब पी़ड़िता ने केस दर्ज कराने की कोशिश की तो उससे कहा गया कि पुलिस अभी चुनाव में व्यस्त है. इसलिए केस दर्ज नहीं हो सकता. चूंकि वीडियो वायरल हो गया था इसलिए मीडिया में खबरें आ गयीं, उसके बाद प्रशासन पर दबाव बना और केस दर्ज किया गया. जिस शख्स ने वीडियो वायरल किया उसकी गिरफ्तारी हुई है बाकी लोग अबतक आजाद हैं. प्रदेश में अभी कांग्रेस की सरकार है ऐसे में सहसा भंवरी देवी की याद आ जाती है,

भंवरी देवी का संघर्ष
चूंकि दोनों ही मामला राजस्थान से जुड़ा है और दोनों पीड़ित महिला दलित हैं. राजस्थान भटेरी गांव की रहने वाली भंवरी देवी दलित सामाजिक कार्यकर्ता थी, जिसने राजस्थान में बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठायी थी और इसका खामियाजा उसे सामूहिक बलात्कार के रूप में भुगतना पड़ा था. इस केस में भी आरोप गुर्ज्जर जाति के लोग ही थे, लेकिनर बलात्कार और सामाजिक अपमान के बाद भी भंवरी देवी ने संघर्ष करना नहीं छोड़ा और मिसाल कायम की. 22 सितम्बर 1992 को जयपुर ज़िले के भटेरी गांव में भंवरी के साथ सिर्फ इसलिए सामूहिक बलात्कार किया गया था क्योंकि उन्होंने गांव में एक बाल विवाह का विरोध किया था. घटना के दिन भंवरी अपने गांव में पति के साथ खेत पर थी. अचानक पांच लोगों ने उनके पति पर हमला किया और भंवरी के साथ बलात्कार किया.भंवरी देवी का काफी अपमान भी हुआ पर उन्होंने आरोपियों के खिलाफ संघर्ष किया.

‘निर्भया फंड’ से मदद
भंवरी ने जिस समय संघर्ष किया था उसके मुकाबले आज की परिस्थितियां काफी भिन्न हैं. कई नये कानून भी 2012 के दिल्ली गैंगरेप कांड के बाद बने हैं. ‘निर्भया फंड’से भी अलवर की पीड़िता को कुछ हद तक मिल सकती है. बलात्कार पीड़िता को मुआवजा और पुनर्वास हेतु सहायता भी मिल सकती है, लेकिन जरूरी यह है कि ऐसी घटनाएं समाज में ना हों.

खतरनाक है रेप के बाद वीडियो बनाने का ‘ट्रेंंड’
आजकल रेप के बाद वीडियो बनाने का ‘ट्रेंड’ चला है, उसके जरिये यह अपराधी महिला को उस हादसे से उबरने नहीं देते और बार-बार उसे अपमानित करते हैं. ऐसी घटनाएं देश में लगातार बढ़ रही हैं. बिहार के जहानाबाद में भी एक लड़की का वीडियो बनाकर उसे वायरल कर दिया गया था. यह मानसिकता बेहद खतरनाक आपराधिक प्रवृत्ति की है, जिसे रोकने के लिए सख्त कानून की आवश्यकता है.

रेप के खिलाफ लोगों को एकजुट होने की जरूरत है, बिहार में जातिवादी संघर्ष का इतिहास रहा है उसके अंदर भी विरोध की यही आग थी. दलित महिलाओं के साथ हुए अन्याय का प्रतिरोध था. अलवर कांड से जो सबक लेने योग्य बात मुझे दिखती है वह है महिला की हिम्मत. इसे हिम्मत को बनाये रखने के लिए हर महिला को उसका समर्थन करना चाहिए, तभी नारी का सम्मान इस देश में बचेगा.

(फेसबुक वाॅल से साभार)


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