झारखंड में माॅब लिंचिंग की घटनाएं और धर्म से इसका कनेक्शन

रांची : देश में इन दिनों माॅब लिंचिंग की घटनाएं चर्चा में हैं. हालिया मामला झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले का है, जहां 17 जून की रात को चोरी के आरोप में एक मुस्लिम युवक तबरेज अंसारी की भीड़ ने पिटाई कर दी और पिटाई के छह दिन बाद अस्पताल में उक्त युवक की मौत हो गयी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि तबरेज की मौत अंदरुनी चोट के कारण हुई है. तबरेज की मौत जब हुई संसद का सत्र चल रहा था, लिहाजा यह मामला देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी संसद में भी उठा और असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं ने इस घटना का राजनीतिक फायदा भी उठाने की कोशिश की. परिणाम यह हुआ कि पीएम मोदी को अपने भाषण में यह कहना पड़ा कि तबरेज की मौत दुखद है, लेकिन इसके लिए झारखंड राज्य को बदनाम करने की जरूरत नहीं है.

तबरेज की मौत के बाद झारखंड के गोड्डा जिले में चोरी के आरोप में फिर दो लोगों की पिटाई की गयी है, जिसमें से एक आरोपी का नाम चांद अंसारी है. यहां भी मामला चोरी का है. लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि जिन युवकों की पिटाई हो रही है वे सभी मुस्लिम समाज के हैं.  तो क्या इरादतन धार्मिक नफरत फैलाने के कारण इनकी माॅब लिंचिंग हो रही है? यह सवाल लाजिमी है.

झारखंड में माॅब लि़चिंग की घटनाएं

झारखंड में माॅब लिंचिंग की घटनाएं सबसे ज्यादा वर्ष 2017 में हुई थी, जब तकरीबन 20 लोग भीड़ की पिटाई से मारे गये थे. अधिकतर घटनाएं सरायकेला-खरसावां और धनबाद-बोकारो और गिरिडीह में हुई. 2017 में अधिकतर माॅब लि़चिंग की घटनाएं बच्चा चोरी के आरोप में की गयी. ग्रामीणों को ऐसा लगा कि कोई बच्चा चोर हो सकता है और भीड़ ने उसकी पिटाई कर दी, जिससे उसकी मौत हो गयी. मारे गये लोगों में सिर्फ मुसलमान नहीं हिंदू भी शामिल थे. जुगसलाई में तीन लोगों की पिटाई बच्चा चोर बताकर की गयी थी जिनमें से उत्तम वर्मा और गणेश कुमार गुप्ता भी शामिल थे. सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर में भी चार लोगों की हत्या बच्चा चोरी के आरोप में गयी. उसके बाद फिर सरायकेला -खरसवां ज़िले में ग्रामीणों ने बच्चा चोर होने के शक में छह व्यक्तियों को पीट-पीट कर मार डाला. नाराज़ भीड़ ने पुलिस की दो गाड़ियों को आग भी लगा दी थी. उस वक्त यह देखा गया कि पुलिस इन घटनाओं को रोकने में असफल रही और ग्रामीण अपनी मनमानी करते रहे. ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीणों में यह खौफ बैठ गया है इन इलाकों में बच्चा चोर का गिरोह सक्रिय है और जब पुलिस उनकी मदद नहीं कर रही, तो वे खुद अपनी सुरक्षा कर रहे हैं.

अंग्रेज़ी अख़बार टेलीग्राफ़ के मुताबिक, बच्चा चोरी के अतिरिक्त जमशेदपुर के आसपास ग्रामीणों की भीड़ ने गो व्यापार के आरोप में भी माॅब लिंचिंग की, जिसमें यहां तीन को पीटकर मार दिया. पुलिस का कहना है कि ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि क्षेत्र में बच्चा चोरी की अफ़वाह फैली हुई थी. पुलिस ने मामले के सांप्रदायिक होने से इनकार किया है. मारे गये तीनों लोग शेख नईम (35), शेख सज्जू (25)और शेख सिराज (26) पशुओं की ख़रीदारी करने निकले थे. इसके अतिरिक्त लातेहार और रामगढ़ में भी पशु व्यापारियों को भीड़ ने मारा. रामगढ़ में एक पशु व्यापारी अलीमुद्दीन अंसारी की हत्या मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 11 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनायी है.

घटनाओं के जरिये फैलायी जा रही है नफरत

झारखंड में माॅब लिंचिंग की घटनाएं दूसरे प्रदेशों से इतर थीं, जिनका धर्म से सीधा कनेक्शन नहीं था, लेकिन विगत कुछ वर्षों में जिस तरह से देश में धार्मिक उन्माद फैलाया जा रहा है, इन घटनाओं को भी सांप्रदायिक रंग दे दिया गया है. राजनेता अपनी राजनीति रोटी सेंक रहे हैं और लोगों में नफरत फैल रहा है या फैल चुका है कह सकते हैं. तबरेज के मामलेे में यह बात साफ जाहिर होती है. तबरेज के चाचा ने यह खुलासा भी किया है कि उसके पिता की मौत भी भीड़ की पिटाई में हुई थी.

सेंदरा की है परंपरा

झारखंड में सेंदरा की परंपरा है, जहां आदिवासी समाज के लोग गलत काम करने वालों को अपने तरीके से सजा देते हैं और वे इसे गलत नहीं मानते. कई बार ऐसी खबरें भी सामने आयीं हैं, जब चोरी और अन्य अपराधों रोकने के लिए ग्रामीणों ने सेंदरा करने का निर्णय लिया.

हर साल वैशाख पूर्णिमा में गिरिडीह, हजारीबाग, मानभूम, बांकुड़ा व संथाल परगना के आदिवासी पारसनाथ पर्वत पर जमा होते हैं और तीन दिनों तक शिकार उत्सव (सेंदरा पर्व) मनाते हैं. दरअसल, दलमा पहाड़ी के एक बड़े हिस्से में बड़ा और घना जंगल है। यहां कई जंगली जानवर रहते हैं. दलमा राजा राकेश हेंब्रम ने कहा- सेंदरा आदिवासी समुदाय का पर्व है। हर हाल में पर्व दलमा के जंगलों में मनाया जाएगा।

 

 

 

 

 

 


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