नए कलाकारों की मदद करने के लिए 10 करोड़ रुपए की अपनी पूरी दौलत दान कर दी थी खैय्याम साहब ने

नवीन शर्मा

खय्याम हिंदी सिनेमा की उस शख़्सियत का नाम है जिसने अपने संगीत की जादूगिरी से गीतों का ऐसा संसार रचा जिसमें आप बेहद आनंदित महसूस करेंगे।

खय्याम साहब के गीतों में जिस तरह कई रंग दिखते हैं वैसे ही उनके नाम भी कई हैं। वैसे तो उनका पूरा नाम मोहम्मद जहूर खय्याम हाशमी था लेकिन वे खय्याम के नाम से ही प्रसिद्ध थे। उन्होंने अपने 89वें जन्मदिन पर नए आर्टिस्ट्स को सहायता करने के लिए पूरी दौलत लगभग 10 करोड़ रुपए दान की थी।

खय्याम पंजाब के जलंधर जिले में पैदा हुए थे। उनको सआदत हुसैन नाम दिया गया। बचपन से ही वह सिनेमा की ओर आकर्षित हो गए। वह केएल सहगल की तरह गायक और अभिनेता बनना चाहते थे। लेकिन उनके परिवार ने इसका विरोध किया। इसलिए उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा।

खय्याम इसके बाद दिल्ली में अपने चाचा के यहां गए वहां उन्होंने पंडित अमरनाथ और पंडित हंसलाल भगतराम से म्यूजिक सीखा। अपने गुरु के कहने पर खय्याम लाहौर पहुंचे। वहां म्यूजिक कंपोजर बाबा चिस्ती से मिले। बाबा चिस्ती ने खय्याम से प्रभावित होकर अपना असिस्टेंट बना लिया। छह महीने तक खय्याम ने उनके साथ काम किया फिर 1943 में वह लुधियाना आ गए। उस वक्त उनकी उम्र 17 थी।

शर्मा वर्मा जोड़ी के नाम से किया डेब्यू
18 साल की उम्र में खय्याम ने सेकंड वर्ल्ड वॉर के दौरान वे सेना में भर्ती हुए। तीन साल बाद खय्याम अपने सपने पूरे करने के लिए मुंबई आए। हालांकि मजेदार बात यह थी कि उन्होंने फिल्मों में डेब्यू शर्माजी के नाम से किया, खय्याम शर्माजी-वर्माजी कंपोजर जोड़ी का हिस्सा थे। वे इसमें शर्माजी थे।

1948 में हीर रांझा पहली फिल्म थी जिसके लिए उन्होंने म्यूजिक दिया। पार्टिशन के बाद इनके पार्टनर रहमान वर्मा के अलग हो जाने के बाद उन्होंने सोलो काम शुरू किया।

यश चोपड़ा की कभी-कभी फिल्म में खय्याम ने एक से बढ़कर एक गीत रचे। कभी-कभी मेरे दिल में ख्याल आता है और मैं पल दो पल का शायर हूं तो लाजवाब हैं। वहीं मेरे घर आई एक नन्हीं परी और प्यार कर लिया तो क्या प्यार है खता नहीं में वे अलग मूड में नजर आते हैं।
इस फिल्म को तीन फिल्म फेयर अवॉर्ड मिले थे। बेस्ट लिरिक्स, बेस्ट म्यूजिक, बेस्ट प्लेबैक सिंगर के लिए।
फिल्म ने बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे।

नसीरुद्दीन शाह, स्मिता पाटिल, फारुख शेख और सुप्रिया पाठक के बेहतरीन अदाकारी से सजी फिल्म बाजार में संगीतकार खय्याम ने कमाल की धुनें बनाईं हैं। दिखाई दिए यूं की बेखुद की याद हमें आप से भी जुदा कर चले में मीर तकी मीर की बेमिसाल शायरी पर खय्याम का दिलकश संगीत सोने पर सुहागा की तरह है। इसी फिल्म में भूपेंद्र की गायी गई ग़ज़ल करोगे याद तो हर बात याद आएगी.. भी सदाबहार है। इसी तरह देख लो आज हमको जी भर के गीत भी दिल की गहराई में उतर जाता है।

उमराव जान फिल्म में जैसे हम रेखा की अदाकारी का सबसे ऊम्दा प्रदर्शन देखते हैं। उसी तरह से इस फिल्म में खय्याम का संगीत भी नई ऊंचाई पर पहुंचता हैं। आशा भोंसले की आवाज़ में जुस्तजू जिसकी थी उसको तो ना पाया हमने, इन आंखों की मस्ती के मस्ताने हजारों हैं और ये क्या जगह है दोस्तों गजलें कमाल की हैं। इनमें खय्याम अपने पूरे रंग में दिखाई देते हैं।

‘फिर सुबह होगी’ के लिए साहिर लुधियानवी ने खय्याम की सिफारिश की थी.
साल 1981 खय्याम के लिए बेहद शानदार साबित हुआ. उनकी तीन एल्बम हिट हुई थी. ”कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता” उनके सबसे बेहतरीन गीतों में से एक है।

थोड़ी सी बेवफाई एकमात्र फिल्म है जिसमें खय्याम ने गुलजार संग काम किया था।दोनों के काम को खूब पसंद किया गया। इस फिल्म का गीत हजार राहे मुड़ के देखीं कहीं पे कोई सदा ना आई सहित अन्य गीत आज भी लोगों के दिलों में बसे हैं।

प्रमुख फिल्में

खय्याम की अन्य यादगार फिल्मों में नूरी, दर्द, रजिया सुल्तान, पर्वत के उस पार, त्रिशूल जैसी‌ फिल्में शुमार हैं।


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