आधुनिक दौर के सन्दर्भ में महाभारत की व्याख्या ‘कलयुग’ को इंडियन सिनेमा का नायाब क्लासिक बनाती है

Balendushekhar Mangalmurty

1981 में रिलीज़ हुई फिल्म “कलयुग” इंडियन सिनेमा की एक माइलस्टोन फिल्म है. इंडियन सिनेमा में उपलब्ध टैलेंट के बेहतरीन उपयोग का नमूना है ये फिल्म. शशि कपूर द्वारा प्रोड्यूस्ड, श्याम बेनेगल द्वारा निर्देशित, इस फिल्म की स्क्रिप्ट लिखी गिरीश कर्नाड और श्याम बेनेगल ने, जबकि कैमरे के पीछे थे गोविन्द निहलानी। म्यूजिक की जिम्मेवारी संभाली बेनेगल की टीम का लम्बे समय से हिस्सा रहे वनराज भाटिया ने , जबकि डायलॉग लिखा स्टेज के दिग्गज लेखक, निर्देशक सत्यदेव दुबे ने और कॉस्ट्यूम्स की जिम्मेवारी संभाली शशि कपूर की पत्नी और मशहूर थिएटर आर्टिस्ट जेनिफर केंडल ने.
शशि कपूर, विक्टर बनर्जी, रेखा, अनंत नाग, ए के हंगल, कुलभूषण खरबंदा जैसे अभिनेताओं के सशक्त अभिनय से सजी फिल्म ” कलयुग” के माध्यम से बेनेगल ने महाभारत की आधुनिक समय के संदर्भ में व्याख्या करके एक क्लासिक फिल्म दर्शकों को दी. उस साल “कलयुग” बेस्ट फिल्म का फिल्म फेयर अवार्ड जीतने में भी सफल रही.

फिल्म की कहानी:
महाभारत से प्रेरित फिल्म “कलयुग” कहानी है दो बिजनस फॅमिली के आपसी संघर्ष की, जो समय के साथ खुनी रूप लेता चला गया और अपने पीछे हिंसा, खून, मौत, पश्चाताप का लंबा ट्रेल छोड़ गया.

एक तरफ पूरनचंद परिवार है, जिसके शीर्ष पर सेठ पूरनचंद की विधवा सावित्री ( सुषमा सेठ) है. सावित्री के तीन लड़के हैं. सबसे बड़ा, धर्मराज ( राजबब्बर). उसकी पत्नी है सुप्रिया (रेखा). दोनों को एक बेटा है, परीक्षित. दूसरा है बलराज ( कुलभूषण खरबंदा). उसकी पत्नी है किरण ( रीमा लागू). दोनों के बेटे का नाम है, सुनील, जो किशोरावस्था छोड़ कर युवावस्था की दहलीज पर दस्तक दे रहा है. तीसरे बेटे का नाम है भरत ( अनंत नाग).

दूसरी तरफ है पूरनचंद के बड़े भाई सेठ खूबचंद का परिवार. सेठ खूबचंद जो शरीर से लाचार हैं और हमेशा व्हील चेयर से बंधे रहते हैं, को देवकी से दो बेटे हैं. बड़ा लड़का, धनराज ( विक्टर बनर्जी), जो अपनी पत्नी विभा और दो बच्चों के साथ है और सेठ खूबचंद कंपनी का बिजनस संभाल रहा है. दूसरे बेटे का नाम है, संदीप ( आकाश खुराना), जो फिलहाल अविवाहित है और बीमारी के चलते कमजोर मष्तिष्क का है.

इस तस्वीर को पूरा करते हैं  भीषम चंद ( ए के हंगल) और कर्ण सिंह ( शशि कपूर). भीषम चंद ने खुद शादी नहीं की, और अपने भतीजों पूरनचंद और खूबचंद की परवरिश की और उनकी शादी कर दी. वहीँ अनाथ कर्ण सिंह को पाला पोषा भीषण चंद ने. बड़ा होकर कर्ण सिंह बेहद काबिल निकला. वो धनराज का गहरा दोस्त है और खूबचंद कंपनी में बहुत ऊँचे पद पर है.

फिल्म की शुरुआत कुछ यूँ होती है. कर्ण की वजह से खूबचंद कंपनी को बहुत बड़ा कॉन्ट्रैक्ट मिला है. पूरनचंद फॅमिली के लोग, खासकर भरत ( अर्जुन की तरह डायनामिक, हैंडसम, इंटेलीजेंट, और अपनी काबिलियत को लेकर अहंकार से भरा; कर्ण से चिढ़ने वाला) काफी उत्तेजित मुद्रा में हैं. उसे समझा रहे हैं पूरनचंद कंपनी के बॉस धर्मराज ( युधिष्ठिर की तरह शांत, न्यायप्रिय; हालाँकि युधिष्ठिर की तरह इन्हे रेस के घोड़ों की लत है) हैं, और मझला भाई बलराज ( भीम की तरह दिलदार, दिमाग से कम, दिल से ज्यादा सोचने वाला, स्ट्रेटेजी बनाने में कोई रोल न निभाने वाला, पर उसे execute करने में अपनी एनर्जी लगाने वाला, जीवन को पुरे आनंद से जीने वाला; ज्यादा टेंशन न लेने वाला).

धर्मराज और उनकी पत्नी सुप्रिया के बीच ठन्डे वैवाहिक सम्बन्ध हैं. वह अपने पति के laidback एप्रोच को बर्दाश्त नहीं कर पाती, बेहद महत्वकांक्षी है और योग्य भी. भरत से उसका भावनात्मक लगाव है और भरत की काबिलियत में उसे पूरा यकीं है, भरत के साथ मिलकर कंपनी के फैसलों में अपनी भूमिका भी निभाती है.

वहीँ दूसरी ओर, धनराज का किरदार दुर्योधन की तर्ज पर ढाला गया है. अहंकार, हर चीज हासिल करने की मंशा, अपने चचेरे भाइयों  के प्रति घृणा के भाव से भरा;. वहीँ संदीप का किरदार दुःशासन की तर्ज पर ढाला गया है, जो जीवन भर अपने बड़े भाई दुर्योधन ( यहाँ धनराज) के व्यक्तित्व की छाया में रहा.

भीषम दादा की जन्मदिन की पार्टी है. दोनों परिवारों के लोग जुटते हैं. उनका कोटेशन हमारे कोटेशन से कम कैसे? ये सवाल भरत को परेशां कर रहा है. पार्टी में भीष्म दादा हँसते हुए कहते हैं, सब मेहनत करते हैं धनराज और कर्ण और क्रेडिट मुझे मिल जाता है. पार्टी में भरत कर्ण को अपनी कंपनी में आने का ऑफर देता है: “अगला टेंडर हमारी तरफ से भरो. डबल सैलरी और पूरा मैनेजमेंट तुम्हारा.” पर कर्ण धनराज के प्रति लॉयल है, उसे दगा नहीं दे सकता. कभी सुप्रिया से विवाह की इच्छा रखने वाला       ( द्रौपदी की तर्ज पर रेखा का किरदार बनाया गया) कर्ण को किसी भी कीमत पर ख़रीदा नहीं जा सकता.

पार्टी में भीषम दादा के मुंह से बात निकल जाती है कि खूबचंद कंपनी के पास विदेश से मंगाए गए तीन High Precision मशीन हैं, जो गवर्नमेंट के कॉन्ट्रैक्ट को पूरा करने के लिए मंगवाए गए थे. उनकी वजह से उत्पादन लागत बेहद कम आती है. इसलिए लौ क्वोट संभव हो पाता है. पर दिक्कत ये है कि कॉन्ट्रैक्ट पूरा हो जाने के बाद ये high precision मशीन सरकार को वापस लौटाने थे, जो खूबचंद कंपनी ने नहीं किया.

STS कॉन्ट्रैक्ट के खिलाफ भरत अपील कर देता है. अब खूबचंद के वर्तमान कॉन्ट्रैक्ट के साथ पिछले मिले तीन और कॉन्ट्रैक्ट पर खतरा मंडरा रहा है. बाजी पलट रही है.

अगर पूरनचंद कंपनी की जीत होती है, तो खूबचंद कंपनी को कुल 57 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट से हाथ धोना पड़ेगा.

धनराज, कर्ण सोच में पड़ गए, जब गवर्नमेंट मशीन की बात कॉन्फिडेंटिअल थी, तो फिर उन्हें कैसे पता चल गया. मीटिंग में भीषम चंद ने स्वीकार किया, कि ये गलती उनसे हुई है. कम्पनी से भीष्म चंद कण्ट्रोल खोते हैं और अब कमान पूरी तरह कर्ण के हाथ आ जाता है. अपील और साथ में 27 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट जीतने के बाद पावरफुल फॅमिली फ्रेंड किशन (अमरीश पूरी) अपनी बेटी सुभद्रा ( सुप्रिया पाठक ) की शादी भरत से कर देते हैं. भरत और सुभद्रा की शादी पर सुप्रिया असहज महसूस करती है. उम्र के अंतर पर सवाल खड़ा करने पर धर्मराज अपने ठन्डे वैवाहिक जीवन पर तंज करने के अंदाज़ में उससे कहते हैं, “विवाहित जीवन के कुछ साल भी सुख से बीत जाए तो इंसान की जिंदगी ख़ुशी ख़ुशी बीत जाती है.”

भीषम चंद प्रयास करते हैं कि परिवारों का आपसी विवाद और आगे न बढे. कॉन्ट्रैक्ट तो ले ही चुके, अब पूरनचंद परिवार उन मशीनों की जिद न करे. पर जब सब आपस में बैठ कर बातें कर रहे हैं, उसी समय impulsive धनराज एक चाल चल जाता है. वह स्वामी प्रेमानंद को बुला लाता है. अब कई छुपे हुए राज सामने आ जाते हैं. स्वामी प्रेमानंद से सावित्री को धर्मराज,बलराज और भरत- तीन बेटे हुए थे. इन्ही स्वामी जी से विवाह के पहले सावित्री को एक और पुत्र प्राप्त हुआ था, जब अंध धार्मिक श्रद्धा वश सुमित्रा और सुमित्रा के पिता स्वामी को अपने घर ले आये थे. बाद में पूरनचंद ने नपुंसक होने के चलते सावित्री को एक बार फिर स्वामी के साथ सम्बन्ध बनाने के लिए राजी कर लिया. सुमित्रा घर पर एकाएक स्वामी प्रेमानंद को देखकर धनराज की चाल समझ जाती है. और अब वो बेहद नाराज होकर भीषम चंद से कहती है, “अब मैं इस मामले में नहीं पड़ूँगी. अब धनराज और भरत को ही आपस में फैसला करने दीजिये.”

भीषम चंद जानते हैं कि धनराज से भारी भूल हुई है. वे जाते जाते धनराज को सुमित्रा से माफ़ी मांगने की सलाह देते हैं. पर धनराज के कानों पर जूं नहीं रेंगता.

भीषम चंद चले गए हैं. कर्ण के हाथ में मैनेजमेंट कण्ट्रोल आ गया है. कर्ण कंपनी के हितों के लिए हर सही गलत रास्ते अपनाता है. वह पूरनचंद कंपनी के सीनियर अफसर सक्सेना को अपने पे रोल पर रखे हुए है. इसके अलावा High precision मशीन पूरनचंद कंपनी में जाने से रोकने के लिए कर्ण अपने आदमी लेबर लीडर भवानी पांडेय ( ओम पूरी) के जरिए पूरनचंद कम्पनी में स्ट्राइक करवा देता है. पूरनचंद कम्पनी गवर्नमेंट आर्डर पूरा करने के लिए दवाब में है. भरत भी नहीं है. भरत और सुभद्रा हनीमून पर गए हैं. सुमित्रा फ़ोन करती है. भरत अपने आधे अधूरे हनीमून से लौटता है.

कंपनी में लॉकआउट ख़त्म करने के लिए भरत भवानी पांडेय से सुलह कर लेता है.
कर्ण फिर से नए चाल चलने की जुगत भिड़ा रहा है. बिजनस rivalry गंदे टर्न लेती जा रही है. कॉन्ट्रैक्ट पूरा करने पूरनचंद कम्पनी का स्टील कन्साइनमेंट विदेश से आने वाला है. कर्ण उसे हाईजैक करवा लेता है. और जब धर्मराज पुलिस में कम्प्लेन करते हैं और इन्शुरन्स लेने की प्रक्रिया पूरी करते हैं, तभी कर्ण पुलिस को फ़ोन कर देता है. पूरनचंद कंपनी का रेपुटेशन डैमेज होता है; पर बलराज एक रात जब फैक्ट्री का चक्कर लगाने गया था, तो उसे वहां अँधेरे में संदीप ( धनराज का छोटा भाई) दिखाई पड़ता है. लम्बे कार चेज के बाद संदीप को बलराज धर लेता है. पर पूछताछ करने के दौरान संदीप अपने होश गँवा देता है और साथ में अपनी जान.

उधर सक्सेना के साथ कर्ण रेस्टोरेंट में बैठा है. सक्सेना घबरा रहा है कि भरत उसके प्रति आशंकित है. वो इस स्थिति से निकलकर यूएस में रिसर्च के लिए निकल जाना चाहता है. कर्ण मदद को तैयार है, बशर्ते सक्सेना उसकी आखिरी बार मदद को राजी हो जाए. दोनों में सहमति बन जाती है. खिड़की से फ्लाइट उड़ता दिखाया जाता है. ये दृश्य बताने को काफी है, सक्सेना यूएस निकल भागा है.
सक्सेना की मदद के चलते पूरनचंद कंपनी का सैंपल रिजेक्ट हो जाता है.

अब भरत अपने बहनोई किशन की मदद से खूबचंद कम्पनी के शेयर भारी मात्रा में खरीद कर मैनेजमेंट बोर्ड में अपनी जगह बनाना चाह रहा है. परेशानियां ख़त्म होने का नाम नहीं ले रही हैं. कर्ण काफी formidable एनिमी साबित हो रहा है. कोढ़ में खाज की तरह पूरनचंद फॅमिली हाउस पर इनकम टैक्स की रेड पड़ती है. आईटी टीम लीडर सुमित्रा ( द्रौपदी के किरदार के तर्ज पर) उसके सामने उसका ब्रा उठाकर दिखाता है. सुमित्रा गुस्से और अपमान में उबल कर भरत को मदद के लिए आवाज देती है, पर भरत अपनी कुर्सी से हिलता नहीं. ये दृश्य द्रौपदी चीर हरण की याद दिलाता है.

बिजनस रायवलरी ने खुनी रूप ले लिया है. पहली जान गयी है, आगे और भी जानें जाने वाली हैं. सक्सेस, मनी, पावर के आगे इंसानी रिश्तों की कीमत कुछ नहीं रह गयी है. धनराज संदीप की मौत के लिए बलराज को जिम्मेवार मानता है और उसे बदला चाहिए.
इधर धनराज बिजनस वार में पिछड़ रहा है. तीनों प्रोजेक्ट्स रुक गए हैं. नए मशीनों की खरीद के लिए लोन की गुंजाइश नहीं. भरत को रोकना है. एक ही उपाय है: फिर से मौत का खेल.

रात 8 बजे. नाइजेरियन इंडस्ट्री मिनिस्टर के साथ भरत की इम्पोर्टेन्ट मीटिंग है. पर कर्ण सावित्री को फ़ोन करके भरत को जाने से रोक लेता है, पर भरत की जगह बलराज का जवान बेटा सुनील ( घटोट्कच एपिसोड की तरह) चला जाता है. उस रात भरत तो बच गया, पर ट्रक एक्सीडेंट में सुनील की बलि चढ़ जाती है. अब भरत भी बदले की आग में जल रहा है. वो कर्ण को सुनील की मौत का जिम्मेवार मानता है.

सावित्री दोनों परिवारों के बीच बिजनस रायवलरी को खुनी रूप लेते देख चिंतित हो जाती है. किसी भी तरह इसे रोकना होगा, उसके मन में बस इतना ही ख्याल है. भीषम दादा से सलाह मशवरा करने जाती है. वे समझाते हैं कि अगर कर्ण को हक़ीक़त से अवगत करा दिया जाए, तो स्थिति सुधर सकती है.

रात का समय है. कर्ण अपने फ्लैट में बैठा है कुछ पढ़ रहा है, संगीत से रिलैक्स हो रहा है. सावित्री को अपने फ्लैट पर आया देखकर कर्ण अचरज में पड़ जाता है. सावित्री कर्ण के सामने इस बात का खुलासा कर देती है, कि वही उसका सबसे बड़ा बेटा है.

अगले शॉट में श्याम बेनेगल अपनी अद्भुत सिनेमाई समझ दर्शाते हैं. कर्ण, जो ब्रिलियंट है, अकेला है, पर मजबूत है, बेड पर लेटा हुआ है, नितांत अकेला, insecure; अपने घुटनों को अपने पेट से सटाए foetal पोजीशन में. एकदम टूटा हुआ, बिखरा हुआ. और साथ कोई नहीं जो इमोशनल सपोर्ट उसे दे.

कर्ण ने खूबचंद कंपनी के पोजीशन से इस्तीफा दे दिया है. मार्किट में कंपनी की शाख इस समाचार से गिर गयी है. ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी पर भी बन आयी है. चारो तरफ से धनराज घिर चुका है. कर्ण के मध्यस्थता के ऑफर को धनराज ठुकरा देता है.

अपने अतीत को जानने के बाद बेचैन कर्ण अपने सवालों के जवाब के लिए भीषम दादा से मिलने गया है. सुनसान सड़क पर कार चल रही है. पीछे हत्यारे की जीप लग गयी है. कर्ण जब तक कार में रहेगा, सुरक्षित रहेगा. पर लौटते समय रास्ते में टायर पंक्चर हो जाता है. कर्ण कार का पहिया बदलने में मगन है. तभी हत्यारे की जीप दूर सड़क पर दिखाई देती है. इससे पहले कर्ण कुछ कर पाता, जीप ठोकर से कर्ण को दूर उड़ा देता है. कर्ण का दुखद अंत हो जाता है.

अगले दृश्य में, धनराज अपनी फैमिली के साथ डिनर ले रहा है. पिछले कुछ दिनों से धनराज परेशान रह रहा है. अपनी माँ देवकी से भी कुछ शेयर नहीं करता है. पर आज डिनर टेबल पर वो खुश नज़र आ रहा है. डिनर के बाद अपने कमरे में जाने से पहले अपनी पत्नी और बच्चों के साथ लाड़ जताता है. सुबह जल्द उठना है. डिनर टेबल पर सब खाना खा रहे हैं, तभी अचानक धनराज के कमरे से गनशॉट की आवाज आती है. धनराज नहीं रहा.

बिजनस वॉर ने दोनों परिवारों को तबाह कर दिया है. भरत जीत गया है, पर जीत कर भी हारा हुआ महसूस कर रहा है. अंतिम दृश्य में भतीजे परीक्षित को बलराज और किरण को बोर्डिंग स्कूल से लेकर आ रहे हैं. परीक्षित अपनी सावित्री दादी और सुमित्रा दादी के बारे में पूछ रहा है जिन्होंने देव प्रयाग में संन्यास ले लिया है. हाँ. उसे समय समय पर दादी से मिलने वे ले जाया करेंगे. हाँ. उसे फिर से बोर्डिंग स्कूल भी नहीं भेजेंगे. क्योंकि अब वही इस बिजनस एम्पायर का वारिस है.

इस अंतिम डायलाग के बाद कैमरा बॉम्बे के हाई राइज बिल्डिंग्स की ओर मुड़ जाता है, मानो बिजनस वार का ये अखाड़ा है, जो कभी ख़त्म नहीं होने वाला है, बस किरदार बदल जाने हैं.

इंडियन सिनेमा का माइलस्टोन फिल्म और शायद श्याम बेनेगल की सबसे परिपक्व और काम्प्लेक्स फिल्म है “कलयुग”

फिल्म बेहद सधी हुई पटकथा के साथ शुरू से अंत तक चलती है, जिसे पूरा सपोर्ट मिला है इसके एक्टर्स के पावरफुल और इंटेंस एक्टिंग से. अनंत नाग अपने किरदार में बेहद इंटेंस हैं. रेखा ने महत्वकांक्षी महिला के किरदार के साथ पूरा न्याय किया है. कुलभूषण खरबंदा ने बलराज के carefree एट्टीट्यूड को अपने खास अंदाज़ में जीवित किया है. विक्टर बनर्जी ने अहंकारी, दिमाग से ज्यादा दिल से सोचने वाले और अपने चचेरे भाईयों से नफरत करने वाले किरदार को परदे पर जिवंत रूप दिया है, वहीँ शशि कपूर ने अपने करियर के एक बेहद अहम् रोल में कर्ण की भूमिका को उसकी मज़बूती और खामियों के साथ याद रखने वाली शक्ल दी है. ओमपुरी धूर्त ट्रेड यूनियन लीडर भवानी पांडेय की भूमिका में बेहद जमे हैं.

फिल्म में दो और पावरफुल एक्टर्स हैं. एक स्क्रीनप्ले- बेनेगल और गिरीश कर्नाड का, जिसने महाभारत का इतना ऑथेंटिक इंटरप्रेटेशन किया है, और दूसरे, गोविन्द निहलानी का कैमरा वर्क. फिल्म भुलाये नहीं भुलाई जा सकती. इंडियन सिनेमा का माइलस्टोन फिल्म और शायद श्याम बेनेगल की सबसे परिपक्व और काम्प्लेक्स फिल्म.

Contact: bsmangalmurty@gmail.com


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