jharkhand election 2019 : इस बार लोहरदगा विधानसभा क्षेत्र में किसका बजेगा डंका? क्या सुखदेव बचा पायेंगे साख?

रांची : झारखंड विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के लिए के कल यानी छह नवंबर को अधिसूचना जारी हो गयी. नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गयी है, हालांकि अभी किसी भी पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी नहीं की है. भाजपा के बड़े नेता कल रात दिल्ली रवाना हुए हैं, जहां प्रत्याशियों की लिस्ट पर अंतिम मुहर लगेगी. ज्ञात हो कि पहले चरण में कुल 13 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होना है, जिनमें से लोहरदगा विधानसभा क्षेत्र काफी अहम है, क्योंकि यहां से सुखदेव भगत भाजपा के प्रत्याशी हो सकते हैं, जो हाल ही अपनी पार्टी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं.

गौरतलब है कि झारखंड में विधानसभा की कुल 81 सीटें हैं, जिनमें से 28 एसटी,  सात एससी और 44 सीटें जेनरल हैं. लोहरदगा एसटी रिजर्व सीट है. यहां से सुखदेव भगत विधायक हैं. सुखदेव भगत ने इस बार लोकसभा चुनाव में भी भाग्य आजमाने की कोशिश की थी और लोहरगा संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़े थें, उन्होंने भाजपा प्रत्याशी सुदर्शन भगत को कांटे की टक्कर दी थी और काफी कम अंतर से चुनाव हारे थे.  उस वक्त तक सुखदेव भगत कांग्रेस में थे और वे कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी भी थे. वे पहलेे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं, लेेकिन लोकसभा चुनाव में जिस तरह उनके साथ भितरघात हुआ उसके बाद उन्होंने पार्टी छोड़ने का मन बना लिया और और भाजपा के साथ आ गये. यह कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है, जिससे उबर पाना पार्टी के लिए मुश्किल नहीं तो आसान भी नहीं होगा.

अलग राज्य गठन के बाद झारखंड में अबतक तीन  विधानसभा चुनाव हुए हैं 2005,2009 और 2014.  लोहरदगा विधानसभा क्षेत्र से 2005 में कांग्रेस की टिकट पर सुखदेव भगत चुनाव जीते थे, 2014 में यह सीट आजसू के खाते में चली गयी और कमल किशोर भगत यहां से चुनाव जीते. 2014 में भी कमल किशोर भगत ही यहां से चुनाव जीतकर आये, लेेकिन हत्या के मामले में उन्हें सात साल की सजा सुनाये जाने के बाद यहां उपचुनाव हुए जिसमें सुखदेव भगत जीत गये. इससे पहलेे हुए 2014 के चुनाव में भी सुखदेव भगत मात्र 592 मतों से पराजित हुए थे.

लोहरगा सीट से सुखदेव भगत को टिकट मिलेेगा यह बात तो तय है, बस पेच इस बात पर है कि यह सीट आजसू के खाते में है. ऐसे में गठबंधन धर्म के नाते भाजपा को इस सीट की खातिर कोई दूसरी सीट आजसू को देनी होगी. सूत्रों के हवालेे से जैसी जानकारी मिल रही है उसके अनुसार आजसू यह सीट छोड़ना नहीं चाहती है क्योंकि यहां उसकी पकड़ है. भाजपा चुनाव समिति की बैठक के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ने अर्जुन मुंडा ने भी इस मसलेे पर कुछ नहीं कहा, वे सिर्फ यह कहकर चले गये कि बातचीत का सिलसिला जारी है और केंद्रीय चुनाव समिति ही इस बारे में कोई फैसला करेगी.  भाजपा के वरिष्ठ नेता दिल्ली रवाना हो चुके हैं, इसलिए संभव है कि आज इस मसले का कोई समाधान निकल जाये, लेकिन सुखदेव भगत के लिए यह सीट बचाना चुनौती है, इसमें कोई दो राय नहीं है.

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