Jharkhandelection2019 : सरकार में रहकर विपक्ष की भूमिका में थे सरयू राय, पहले लिस्ट में नहीं आया नाम

रांची : झारखंड विधानसभा के लिए भाजपा ने अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है. इस सूची में कुल 52 प्रत्याशियों के नाम शामिल हैं.  चौंकाने वाली बात यह है कि सूची में भाजपा के वरिष्ठ और कद्दावर नेता सरयू राय का नाम शामिल नहीं है.  सरयू राय जमशेदपुर वेस्ट विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर आये थे, लेकिन पहली सूची में सरयू राय का नाम शामिल नहीं है. साथ ही खूंटी से विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा और सिसई विधायक  दिनेश उरांव का नाम भी भाजपा प्रत्याशियों की पहली सूची में नहीं है. अब सवाल यह है कि क्या भाजपा इन नेताओं का इस बार टिकट काटने का मन बना चुकी है या फिर अभी बातचीत से मसलों को हल किया जा सकता है?

सरयू राय की उम्मीदवारी पर पेच फंसने का कारण है उनका आक्रमक तेवर. सरकार में रहते हुए भी सरयू राय ने जिस से सरकार के कामकाज का रिव्यू किया है, उससे सीएम रघुवर दास की परेशानी हमेशा बढ़ी है. पुरानी बातों पर अगर ध्यान ना भी दें और हालिया फैसलों की ही बात करें तो सरयू राय ने मुख्यमंत्री के चुनावी अभियान ‘घर-घर रघुवर’ का जमकर विरोध किया था और ट्‌वीट कर अपनी बात रखी थी. सरयू राय का कहना था कि इस चुनावी अभियान का नाम ‘घर-घर कमल’ होना चाहिए. सरयू इस बात के भी खिलाफ थे कि विधानसभा चुनाव का प्रचार लोकसभा चुनाव की तरह किया जाये और सांसदों से इस मौके पर रिटर्न गिफ्ट मांगा जाये क्योंकि लोकसभा चुनाव के दौरान विधायकों ने अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में पूरी मेहनत की थी. लेकिन सरयू का कहना है कि लोकसभा चुनाव में पीएम का एक सर्वमान्य चेहरा था, साथ ही मुद्दे भी अलग थे, जबकि विधानसभा चुनाव में वह स्थिति नहीं है और विधायकों का अपना प्रदर्शन  जीत हार में अहम भूमिका निभायेगा.

सरकार में खाद्य आपूर्ति मंत्री रहे सयू राय ने हमेशा ही सरकार के कामकाज पर सवाल उठाया और अपने इस्तीफे की पेशकश तक कर दी थी. उन्होंने इस साल की शुरुआत में कहा था कि इस सरकार में बने रहना शर्मनाक है क्योंकि विभिन्न विभागों में भ्रष्टाचार चरम पर है. उन्होंने कहा, था मैं राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मिलकर इस्तीफे की अनुमति मांगूंगा। उन्हें यहां के ब्यूरोक्रेसी और विभागीय भ्रष्टाचार के बारे में बताऊंगा। कहूंगा कि अगर मैं फिट नहीं तो मुझे राज्य मंत्रिपरिषद से इस्तीफा देने की अनुमति दें. राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में भ्रष्टाचार चरम पर है. बार-बार पत्र लिखने पर भी उस पर कार्रवाई नहीं हो रही है. प्रदेश में पार्टी के जो लोग उचित स्थान पर हैं, वे भी समाधान नहीं खोज सकते तो तकलीफ होती है. अब अपने पद पर बने रहने में शर्म महसूस होती है.


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