Listen… Amaya (2013): फारुख शेख और दीप्ति नवल की एक जोड़ी के तौर पर आखिरी फिल्म

Balendushekhar Mangalmurty

फारुख शेख और दीप्ति नवल की बतौर एक लीडिंग पेयर अंतिम फिल्म थी लिसेन अमाया. 2013 में आयी इस फिल्म के रिलीज़ होने के कुछ दिनों के बाद ही फारुख शेख का देहांत हो गया. 1980 के दशक में साथ साथ, चश्मे बद्दूर, कथा, रंग बिरंगी, किसी से न कहना आदि फिल्मों में दर्शकों ने दीप्ति नवल और फारुख शेख की जोड़ी को काफी सराहा था. लगभग दो दशक के बाद दोनों सुनहरे परदे पर फिर लीडिंग पेयर के तौर पर लौटे और दर्शकों ने फिर वही गर्मी, टेंडरनेस महसूस किया, जिसने फारुख शेख और दीप्ति नवल की जोड़ी को 80 के दशक में हिंदी सिनेमा की सबसे बेहतरीन जोड़ियों में शुमार करवाया था.
अविनाश कुमार सिंह द्वारा निर्देशित फिल्म लिसेन अमाया अपने एहसासों की गर्मी की, दो सीनियर सिटीजन्स जयंत ( फारुख शेख) और लीला ( दीप्ति नवल) के द्वारा अपने पर्सनल लॉस को पीछे छोड़ कर साथ में प्रेम, सुकून, दोस्ती और साथ खोजने के प्रयास और इस प्रयास में लीला की बेटी अमाया का खुद को insecure फील करना और अंततः इस रिश्ते को व्यक्तिगत स्वार्थ और तंग सोच से ऊपर उठकर अपनाने की दास्तान है. फिल्म बताती है कि प्रेम एक खूबसूरत एहसास है और इसका युवा उम्र से कोई लेना देना नहीं है.

फिल्म की कहानी:

लीला एक लाइब्रेरी कैफ़े चलाती है, “Book A Coffee” जहाँ लोग आते हैं कॉफ़ी पीते हैं और बुक्स पढ़ते हैं. इसी कैफ़े में जयंत उर्फ़ जैज भी आया करते हैं. जैज पेशे से फोटोग्राफर हैं , और अकेले हैं . एक एक्सीडेंट में उन्होंने अपने परिवार को खो दिया है. लीला के हस्बैंड का भी 12 साल पहले देहांत हो गया है. कैफ़े को चलाने में लीला की बेटी अमाया ( स्वरा भाष्कर) अपनी माँ की मदद करती है.

जयंत के साथ अमाया पुरानी दिल्ली पर एक कॉफ़ी टेबल बुक प्लान कर रही है. जब ये बात वो उत्साह से एक युवक से बोलती है, तो मासूमियत से बोलता है: “He likes Auntie, Na?” जयंत को वहां आने वाले सारे कॉलेज स्टूडेंट्स बहुत पसंद करते हैं, लीला ऑन्टी भी उन युवाओं की टोली की फेवरिट है. पर यह सुनकर अमाया के चेहरे पर भाव कड़वे हो जाते हैं.

लीला का बर्थडे मनाया जा रहा है. जयंत भी है वहां. एक गेस्ट पूछ बैठता है: आपके हस्बैंड भी राइटर हैं? दोनों डांस कर रहे हैं, दोनों के दिल में एक दूसरे के लिए वार्मथ साफ़ साफ महसूस किया जा सकता है. अमाया अमेरिका से आये उसी गेस्ट के साथ खड़ी है, वो असहज महसूस कर रही है.
अमाया जैज ( जयंत) को पसंद तो करती है, पर अपनी माँ को लेकर पोसेसिव है. वो देख रही है, माँ सिर्फ उसके साथ नहीं, बल्कि जैज के साथ भी खुश है. रात में अमाया ने बिरयानी बनायी है. अमाया और लीला डिनर के लिए बैठे हैं. जैज का फ़ोन आता है. जब लीला अमाया को फ़ोन उठा लेने के लिए कहती है, तो वो मुंह बिचकाकर फ़ोन माँ की तरफ बढ़ा देती है. एक बार अमाया अपने दोस्तों के साथ पार्टी पर जा रही है, जैज और लीला साथ में डिनर करने जा रहे हैं, अमाया को ये पसंद नहीं आता.
अमाया एक पढ़ी लिखी, इंडिपेंडेंट लड़की है, कॉंफिडेंट अपनी सोच, अपनी काबिलियत को लेकर. अपने पिछले एम्प्लॉयर को उसने बेहिचक थप्पड़ जड़ दिया था, जब उसने कुछ अनुचित बातें कहीं थीं. पर जब जैज के साथ माँ के रिश्ते की बात आती है, तो अमाया पोसेसिव हो जाती है, insecure हो जाती है. मानो वो माँ को एक पर्सन के रूप में देखने को राजी नहीं, माँ मतलब वही sacrificing soul, त्याग की प्रति मूर्ति. जो अपनी खुशियों के लिए सोचेगी, तो फिर उस ऊँचे नैतिक स्थान से गिर जाएगी, जहाँ पर अमाया ने उसे बिठाकर रखा है. इस मामले में अमाया पुरुषवादी सोच जिसे कहते हैं, उससे खुद को मुक्त नहीं कर पा रही है, पुरुषवादी सोच, जो स्त्री को अपनी संपत्ति समझता है, जहाँ माँ की एक ही छवि है, त्याग की, जो किसी भी हालत में टूटनी नहीं चाहिए. और इस छवि को गढ़ते गढ़ते पुरुषवादी सोच माँ को इसी इमेज का बंदी बना बैठता है और एक स्वतंत्र व्यक्तित्व के तलाश की छटपटाहट को स्वीकारने से इंकार करता है. पढ़ी लिखी, मॉडर्न लड़की अमाया भी अपने subconscious mind में माँ को इसी इमेज का कैदी बना बैठी है.

एक बार जैज लीला के साथ बैठे अपनी कहानी शेयर कर रहे हैं. वे अपनी बेटी अदिति और पत्नी माधवी के साथ घूमने जा रहे थे, रास्ते में एक ढाबे पर वे खाने का सामान लेने रुके. उनकी नज़र कार में बैठे दोनों लोगों पर गयी, दोनों मुस्कुरा रहे थे और जैज का इन्तजार कर रहे थे, तभी पीछे से एक ट्रक ने कार में जोरदार टक्कर मारी. जैज इससे पहले कुछ समझ पाते, दोनों ने वहीँ घटनास्थल पर दम तोड़ दिया. लीला जैज को सांत्वना दे रही है, जैज की आँखों में आंसू हैं. तभी कमरे में अचानक अमाया आ जाती है. वो सारी चीजों को गलत तरीके से लेती है. Listen अमाया…, लीला के मुंह से बस इतना ही निकला.

अमाया ने जिद ठान ली है. वो बंगलौर सुजाता के पास जायेगी. वो अब बुक लिखने के प्रति उत्साहित नहीं है. अमाया कहती है, ” यादें बड़ी पर्सनल होती हैं और हमें कोई हक़ नहीं होता कि दूसरे की यादों को कुरेदें. हमें किताब शुरू ही नहीं करनी चाहिए थी.
लीला अमाया के स्ट्रांग रिएक्शन को लेकर पशोपेश में है. लीला अमाया से कहती है, ” ये बारह साल बहुत मुश्किल थे. बाला के गुजरने के बाद तुम्हे पालना ही अपने आप में एक चैलेंज था, पर मैंने एन्जॉय किया. I am proud the way you grew up. I started Book a Coffee. Jayant made me feel like a woman again. हम जिंदगी साथ गुजारना चाहते हैं.” अमाया उठ कर चली जाती है. दोनों के बीच एक ख़ामोशी सी पसर गयी है.

जैज हर साल रानीखेत जाया करते हैं. उसी ढाबे पर. एक्सीडेंट स्पॉट पर. जैज बता रहे हैं, “अब उतनी तकलीफ नहीं होती है. मैं रानीखेत क्यूँ जाता रहता हूँ? क्यूंकि मैंने पुरानी यादों को संभाल कर रखा हुआ है. अमाया भी वही कर रही है.”
अमाया को राघव प्रेम करता है, पर जैज और माँ के रिश्ते को लेकर परेशान राघव पर खास ध्यान नहीं देती है.
एक दिन उसने माँ और जैज के सामने बहुत बदतमीजी कर डाली, ” मॉम कम से कम आपने ये तो सोचा होता कि बैडरूम डैड का है. He makes me feel like a women. यही कहा था न आपने? Is it all about sex?” लीला आहत हो जाती है. जैज कहते हैं: अगर यही बात अदिति ने कही होती, तो मैं उसे slap करता.” जैज़ बेहद उदास होकर चले जाते हैं.
अमाया को राघव घेरता है, “अमाया तुम मॉडर्न गर्ल होने का दावा करती हो, पर तुम hypocrite हो. Amaya, everything is not about you ! What is your problem?
“Problem is to know that Mom is sleeping with another man.”
“You disappoint me, Amaya.”

बुक प्रोजेक्ट को पब्लिशर मिल गया है. पब्लिशर जैज की फोटोग्राफी का बेहद प्रशंसक है. जैज पुरानी दिल्ली की तस्वीरें खिंच रहे हैं, और अमाया लिख रही है. अमाया की जैज से सिर्फ काम की बातें होती हैं और माँ से भी उसने बात लगभग बंद कर दी है. माँ उसे कई बार समझाने की कोशिश करती है, Grown ups don’t behave like this. तुमने उस दिन कहा था न Is it just the sex? शायद हम एक दूसरे को बिलकुल नहीं जानते. पर अमाया समझने को तैयार नहीं.

लीला के लिए फैसले की घडी है. जैज को वो अपना फैसला सुनाती है, ” यादें जिंदगी नहीं होतीं, यादें जिंदगी का हिस्सा होती हैं. ये तुमसे मिलकर जाना. कोई भी ख़ुशी जिसमे मेरी बेटी खुश नहीं है, मुझे नहीं चाहिए. काश हम साथ जी सकते.” जैज लीला की परिस्थिति समझते हैं. वो लीला के फैसले का सम्मान करते हैं, ” I love you Leela and I love Amaya, too.”

अमाया की बुक छपने के लिए चली गयी है. पब्लिशर ने दोनों को ऑफर दिया है, इसके सीक्वल पर काम कीजिये.
दिन बीत रहे हैं, जैज अब कैफ़े नहीं आते. उनकी कुर्सी खाली पड़ी रहती है. लीला मशीन की तरह अपने काम में लगी रहती है. अमाया अपनी माँ से रीकनेक्ट होने की कोशिश कर रही है.
और एक दिन अमाया जैज से मिलने उनके घर जाती है. उसके हाथ में बुक है. अमाया कहती है, ” आपको गुस्सा क्यों नहीं आता? कोई इतना अच्छा कैसे हो सकता है? अप्पा होते तो दो थप्पड़ मारकर मेरा दिमाग ठीक कर देते.” जैज के हाथ में बुक थमाते हुए अमाया कहती है, आपके बिना ये किताब कभी पूरी नहीं होती.

अंतिम दृश्य में जैज अमाया के साथ रोड क्रॉस कर रहे हैं. अचानक वे एकदम खोये खोये से लगने लगे हैं. एकदम disoriented ! “मुझे याद नहीं आ रहा है, अदिति, मुझे जाना कहाँ है?” अमाया सन्न रह जाती है.
माँ, आपको पता था? मुझे पहले क्यों नहीं बताया?
जैज अल्जेमर डिजीज की गिरफ्त में आ चुके हैं.

एक बेहद प्यारी फिल्म है Listen अमाया !
फिल्म के डायलाग गीता सिंह ने लिखे हैं और फिल्म का निर्देशन अविनाश कुमार सिंह ने किया है. फिल्म के डायलॉग कई जगहों पर दिल को छू जाते हैं. एक गर्मी पैदा कर जाते हैं, तो कई जगह पर नश्तर की तरह चुभ जाते हैं. फिल्म फारुख शेख, दीप्ति नवल और स्वरा भाष्कर के मज़बूत कंधो पर टिकी है. 25 साल बाद जब फारुख शेख और दीप्ति नवल सुनहरे परदे पर साथ आते हैं, तो वही साथ साथ, और चश्मे बद्दूर वाला warmth पैदा करते हैं. फिल्म में कॉंफिडेंट, लेकिन माँ के रिश्तों को लेकर insecure युवती की भूमिका में स्वरा भास्कर जंचती हैं.


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